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Majrooh Sultanpuri Inspirational Teacher's Day Song रुक जाना नहीं तू कहीं हार के

रुक जाना नहीं तू कहीं हार के – मजरुह सुलतानपुरी

रुक जाना नहीं तू कहीं हार के
कांटों पे चल के मिलेंगे साये बहार के
ओ राही, ओ राही

नैन आंसू जो लिये हैं, ये राहों के दिये हैं
लोगों को उनका सब कुछ देके
तू तो चला था सपने ही लेके
कोई नहीं तो तेरे अपने हैं सपने ये प्यार के

सूरज देख रुक गया है, तेरे आगे झुक गया है
जब कभी ऐसे कोई मस्ताना
निकले है अपनी धुन में दीवाना
शाम सुहानी बन जाते हैं दिन इंतजार के

साथी ना कारवाँ है, ये तेरा इम्तिहान है
यूँ ही चला चल दिल के सहारे
करती है मंजिल तुझ को इशारे
देख कहीं कोई रोक नहीं ले तुझको पुकार के

मजरुह सुलतानपुरी

गीतकार: मजरुह सुलतानपुरी
गायक: किशोर कुमार
संगीतकार: लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
कलाकार: विनोद खन्ना, तनूजा
चित्रपट: इम्तिहान (1974)

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