Home » Poems For Kids » Poems In Hindi » Nostalgia Hindi Poem about Relations अब कहाँ
Nostalgia Hindi Poem about Relations अब कहाँ

Nostalgia Hindi Poem about Relations अब कहाँ

बचपन की तरह, अब बेटे कहाँ झगड़ते है
माँ मेरी, माँ मेरी, भाई से भाई कहाँ कहते है।

कभी ख्वाइशें आकर, सीने से लिपटती थी,
सुने शजर की तरह, अब घर में बुजुर्ग रहते है।

न बरकत, न उस घर में खुशियाँ रहती है
भाई-भाई जहाँ आँगन में दिवार रखते है।

कोई अखबार बेचने, कोई कारखाने गया,
गरीबो के बच्चे, जिमेदारियाँ समझते है।

परदेश पढ़ने गए बेटे, लौट के घर आये नही,
घर, जर, जमीं सब साहूकारो के रहन रहते है।

दोस्त हक़ की बात भी हक़ में नहीं बोलते
सोहरत के काँटे, रिश्तों को चुभने लगते है।

मुफलिसी ता’उम्र, इक छत को तरसती है
मस्जिदों में खुदा, मंदिरो में भगवान रहते है।

मुझको इंसानो में, इंसान भी नहीं मिलते,
और लोगो को पत्थरो में भगवान दिखते है।

~ संजय शर्मा

आपको संजय शर्मा जी की यह कविता “अब कहाँ” कैसी लगी – आप से अनुरोध है की अपने विचार comments के जरिये प्रस्तुत करें। अगर आप को यह कविता अच्छी लगी है तो Share या Like अवश्य करें।

यदि आपके पास Hindi / English में कोई poem, article, story या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें। हमारी Id है: submission@4to40.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ publish करेंगे। धन्यवाद!

Check Also

How to draw bird

How To Draw Bird: Drawing Lessons for Students and Children

How To Draw Bird: Drawing Lessons for Students and Children – Step – by – …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *