Home » Poems For Kids » Poems In Hindi » माँ – अनिल शर्मा Mother’s Day Poem in Hindi
माँ - अनिल शर्मा

माँ – अनिल शर्मा Mother’s Day Poem in Hindi

वह मेरी बदसलूकी में भी मुझे दुआ देती है,
आगोश में ले कर सब गम भुला देती है।

यूं लगता है जैसे जन्नत से आ रही हो खुशबु
जब वह अपने पलू से मुझे हवा देती है।

मैं अगर करूँ अनजाने में भी कोई गलती,
मेरी मां इस पर भी मुस्कुरा देती है।

क्या खूब बनाया है रब ने रिश्ता माँ का,
वीरान घर को भी जन्नत बना देती है।

माँ के बाद मेरा कौन सहारा है,
ये ही सोच मुझे कभी-कभी रुला देती है…।

~ प्रो. अनिल शर्मा

आपको प्रो. अनिल शर्मा जी की यह कविता “माँ” कैसी लगी – आप से अनुरोध है की अपने विचार comments के जरिये प्रस्तुत करें। अगर आप को यह कविता अच्छी लगी है तो Share या Like अवश्य करें।

यदि आपके पास Hindi / English में कोई poem, article, story या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें। हमारी Id है: submission@4to40.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ publish करेंगे। धन्यवाद!

Check Also

फर्नीचर - Children's Hindi Poem on Home Furniture

फर्नीचर – Children’s Hindi Poem on Home Furniture

थोड़ा-बहुत  फर्नीचर तो हर घर में होता है, सोने, उठने-बैठने, रखने को कुछ तो होता …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *