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माँ - अनिल शर्मा

माँ – अनिल शर्मा Mother’s Day Poem in Hindi

वह मेरी बदसलूकी में भी मुझे दुआ देती है,
आगोश में ले कर सब गम भुला देती है।

यूं लगता है जैसे जन्नत से आ रही हो खुशबु
जब वह अपने पलू से मुझे हवा देती है।

मैं अगर करूँ अनजाने में भी कोई गलती,
मेरी मां इस पर भी मुस्कुरा देती है।

क्या खूब बनाया है रब ने रिश्ता माँ का,
वीरान घर को भी जन्नत बना देती है।

माँ के बाद मेरा कौन सहारा है,
ये ही सोच मुझे कभी-कभी रुला देती है…।

~ प्रो. अनिल शर्मा

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