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शिक्षाप्रद हिंदी कहानी: दिवाली की ऑनलाइन शॉपिंग

शिक्षाप्रद हिंदी कहानी: दिवाली की ऑनलाइन शॉपिंग

“ऑनलाइन शॉपिंग का क्या बुखार चढ़ा है तुम्हें”? रोहित आशीष के कमरे में घुसता हुआ बोला।

“हा हा… कितने आराम से सभी चीज़े घर बैठे मिल जाती है और वो भी बहुत सस्ती” आशीष हँसते हुए बोला।

“वो तो ठीक है, पर इसका मतलब ये तो नहीं कि तू पेन से लेकर पेंसिल तक ऑनलाइन ही ख़रीदे। हम सब दोस्तों के साथ तो तूने जैसे बाज़ार जाना छोड़ ही दिया”।

“रूक जा… जरा दिवाली में पहनने के लिए नया सिल्क का कुरता तो पसंद कर लू”।

“अरे वाह… सिल्क का कुरता! रोहित हँसता हुआ बोला।

“हाँ, मम्मी कह रही है कि इस बार अपने मनपसंद कपड़े खरीद लू, इसलिए मैं सफ़ेद रंग का सिल्क का कुरता लूँगा”। और आशीष के माउज़ पर क्लिक करते ही कई खूबसूरत डिज़ाइन के कुरते कंप्यूटर की स्क्रीन पर खुल गए।

“अरे वाह…कितने सुन्दर कुरते!” रोहित के मुँह से अचानक निकला।

ये सुनकर आशीष तो ऐसे खुश हो गया मानों सारे कुरते उसी ने बनाये हो।

“अब बता इनमें से कौन सा पसंद करू?” आशीष ने कम्प्यूटर की स्क्रीन पर नज़रें गड़ाए हुए पूछा।

पर रोहित बोला – “मैं जहाँ पर कपड़े खरीदने जा रहा हूँ, तू एक बार वहाँ भी देख ले, क्या पता तुझे कोई पसंद ही आ जाए। तब तक आशीष की मम्मी कमरे में आ चुकी थी। वो थोड़ा गुस्से से बोली – “हर बात और हर चीज़ के लिए ऑनलाइन सामान खरीदना मूर्खता है, दोस्तों और परिवार वालों के साथ जाकर सामान खरीदने में जो ख़ुशी मिलती है, वो भला इन सबमें कहाँ मिलेगी?”

“ओह मम्मी, अब फ़िर आप मुझे इसके फ़ायदे और नुकसान गिनाने लगोगी, इससे तो अच्छा है कि मैं रोहित के साथ कपड़े खरीदने बाज़ार चला जाऊ”।

तो तुझे भी पैसे दे दू… मम्मी खुश होते हुए बोली।

नहीं नहीं, अपने लिए नहीं बल्कि रोहित के लिए कपड़े पसँद करवा लूँ और ये कहकर वो कमरे से बाहर निकल गया।

रोहित आशीष को लेकर कपड़े की एक बहुत बड़ी दूकान पर गया और बोला – “मेरी बात मान तो तू भी यही से अपने लिए सिल्क का कुरता ले ले, इनके पास बहुत वैराइटी है।

खूबसूरत कढ़ाई और ढेर सारे कुरते देखकर आशीष का मन ललचा उठा, पर अब इतने सारे ऑन लाइन शौपिंग के फ़ायदे गिनाने के बाद वो अपनी बात से पीछे नहीं हटना चाहता था, इसलिए उसने मुँह बनाते हुए कहा – “जो मेरी कम्पूटर स्क्रीन पर आए लेटेस्ट डिजाइन वाले कुर्तों में बात है वो भला यहाँ कहाँ?”

रोहित ने हँसते हुए कहा – “तू तो बड़ा जिद्दी है, अच्छा चल मेरे लिए एक कुरता और शर्ट पसंद कर ले”।

आशीष ने बहुत देर तक कई कपड़े देखने के बाद एक सफ़ेद रंग का कुरता और एक लाल शर्ट पसंद करी।

रोहित बोला – “तेरी और मेरी नाप लगभग एक ही है, तू जल्दी से कुरता डालकर देख ले और मैं तब तक शर्ट पहन कर देख लेता हूँ और ये कहते हुए रोहित ट्रायल रूम में चला गया उधर दूसरे ट्रायल रूम में जब आशीष ने कुरता पहनकर देखा तो वो उसे बहुत पसंद आया। उसका मन किया कि वो भी अपने लिए उसी दुकान से कपड़े ले ले पर फ़िर उसे याद आया कि उसने मम्मी पापा के साथ-साथ सबको कह दिया था कि इस साल वो ऑनलाइन शौपिंग ही करेगा वरना एक भी कपड़ा नहीं खरीदेगा।”

तभी रोहित ने बाहर आकर पूछा – “शर्ट तो बिलकुल ठीक आई है और कुरता?”

“कुरता भी बहुत सुन्दर और सही नाप का है” आशीष हाथ में पकड़े बर्फ़ से सफ़ेद कुर्ते और उसके सुनहरे बटन को देखते हुए बोला।

“ठीक है… फ़िर चलकर पैसे दे देते है” रास्ते भर आशीष अनमना ही रहा रोहित के बहुत पूछने पर भी वो कोई कारण नहीं बता सका।

घर पहुँचते ही उसने सबसे पहले अपने लिए एक कुरता ऑर्डर किया। लाख चाहने के बावजूद भी उसे दुकान जैसा मनपसंद डिज़ाइन वाला कुरता कई साईट्स देखने के बाद भी नहीं मिला।

तभी पापा कमरे में आए और पूछा – “मिल गया तुम्हें सुनहरे बटन वाला अपना मनपसंद कुरता?”

“नहीं पापा, दिवाली के कारण सभी कुर्ते बिक गए, अब तो कुछ ही बचे थे, उन्हीं में से एक ले लिया है”।

“ठीक है, अब चलो बाज़ार से मिठाई खरीद कर आते है”।

“पापा, यहीं से ऑर्डर दे दीजिये ना, एक से बढ़कर एक ऑफ़र है”।

पाप ने उसे घूरकर देखा तो आशीष तुरंत कुर्सी छोड़ बाज़ार जाने के लिए उठ खड़ा हुआ।

बाज़ार में ढेर साड़ी शॉपिंग करने के बाद आशीष जब पटाखें वैगरह लेकर घर लौटा तो बहुत खुश था।

दिवाली की तैयारों में दिन मानों पंख लगाकर उड़े जा रहे थे।

दिवाली की एक रात पहले मम्मी ने अगले दिन पहनने के लिए सबके कपड़े निकाले और आशीष से पूछा – “कल तुम पूजा के समय क्या पहनोगे, तुम्हारा कुरता तो अभी तक आया ही नहीं?”

आशीष उस समय पानी पी रहा था। मम्मी की बात सुनते ही उसे ठसका लग गया। मम्मी ने घबराते हुए उसकी पीठ सहलाई और बोली – “आराम से पिया करो पानी, सौ बार बता चुकी हूँ”।

“पानी को छोड़ो मम्मी, आपने मुझे बताया नहीं कि कुरता नहीं आया?”

“तो क्या कर लेते तुम, कम्प्यूटर के अंदर जाकर ले आते?”

“कम से कम उन्हें फोन करके तो पूछता…” आशीष रुँआसा होता हुए बोला।

“वो मैं कर चुकी हूँ, कह रहे थे कि कल तक आ जाएगा वरना वो तुम्हें पैसे वापस कर देंगे”।

“तो क्या मैं कल रुपये पहनूँगा?” आशीष गुस्से में पैर पटकते हुए बोला।

मम्मी ने आशीष को गुस्से से देखा तो वो डर के मारे चुप हो गया पर रोकते हुए भी उसकी आँखें भर आई।

मम्मी ने प्यार से उसके सर पर हाथ फेरते हुए कहा – “मम्मी पापा तुम बच्चों से बहुत अनुभवी होते है। अगर हम तुमसे बार मार इतने कम समय में मंगवाने के लिए मन कर रहे थे, तो तुम्हें हमारी बात मान लेनी चाहिए थी”।

“गलती हो गई मम्मी” आशीष रूंधे गले से बोला।

तभी आशीष के कमरे से रोहित निकल कर आया और उसे एक चमकीला पैकेट पकड़ते हुए बोला – “मेरी तरफ़ से दिवाली पर ये तोहफ़ा”।

आशीष ने सर झुकाये हुए ही कहा – “तुम मेरे सबसे अच्छे दोस्त हो पर अभी इसे मेज पर रख दो”।

“वो तुम्हारे लिए इतने प्यार से कुछ खरीद कर लाया है, देख तो लो” मम्मी आशीष को पैकेट पकड़ाते हुए बोली।

आँसूं पोंछते हुए आशीष ने अनमने ढंग से पैकेट फ़ाड़ना शुरू किया। रैपर हटते ही आशीष ने रोहित की ओर आश्चर्य से देखा जो मुस्कुराते हुए उसी की ओर देख रहा था। पैकेट पकड़े ही वो रोहित की तरफ़ दौड़ा और उसके गले लग भरभराकर रो पड़ा।

पैकेट में वही कुरता था, जो रोहित ने जबरदस्ती उसे साथ ले जाकर ख़रीदा था।

“देख लिए ऑनलाइन शॉपिंग के नतीजे” रोहित हँसते हुए बोला।

आशीष ने धीरे से कहा – “जब तेरा जैसा दोस्त हो तो सब नतीजे अच्छे ही होते है”।

और बाहर से आते पटाखों की आवाज़ के साथ ही कमरा जोरदार ठहाकों से गूँज उठा।

~ मंजरी शुक्ला [नन्हें सम्राट में भी प्रकाशित]

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