गिरिजा कुमार माथुर जी द्वारा शब्द-चित्रण - थकी दुपहरी

गिरिजा कुमार माथुर जी द्वारा शब्द-चित्रण – थकी दुपहरी

थकी दुपहरी में पीपल पर
काग बोलता शून्य स्वरों में
फूल आखिरी ये बसंत के
गिरे ग्रीष्म के ऊष्म करों में

धीवर का सूना स्वर उठता
तपी रेत के दूर तटों पर
हल्की गरम हवा रेतीली
झुक चलती सूने पेड़ों पर

अब अशोक के भी थाले में
ढेर ढेर पत्ते उड़ते हैं
ठिठका नभ डूबा है रज में
धूल भरी नंगी सड़कों पर।

वन खेतों पर है सूनापन
खालीपन निःशब्द घरों में
थकी दुपहरी में पीपल पर
काग बोलता शून्य स्वरों में

यह जीवन का एकाकीपन
गरमी के सुनसान दिनों सा
अंतहीन दोपहरी, डूबा
मन निश्चल है शुष्क वनों सा।

~ गिरिजा कुमार माथुर

आपको गिरिजा कुमार माथुर जी का यह शब्द-चित्रण “थकी दुपहरी” कैसा लगा – आप से अनुरोध है की अपने विचार comments के जरिये प्रस्तुत करें। अगर आप को यह कविता अच्छी लगी है तो Share या Like अवश्य करें।

यदि आपके पास Hindi / English में कोई poem, article, story या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें। हमारी Id है: submission@4to40.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ publish करेंगे। धन्यवाद!

Check Also

delightful video of a little boy who broke the internet with his incredible dance moves while watching a performance for US First Lady Melania Trump at a Delhi government school

Viral Video From Melania Trump Visit That Is Delighting Twitter

Anand Mahindra shared a delightful video of a little boy who broke the internet with …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *