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महिला दिवस पर कविता - पहली नारी

महिला दिवस पर कविता: पहली नारी

मेरा प्रणाम है पहली नारी सीता को जिसने एक सीमा (लक्ष्मण रेखा) को तोडकर भले ही जीवन भर अथाह दुख सहे लेकिन आधुनिक नारी को आजादी का मार्ग दिखा दिया

धन्य हो तुम माँ सीता
तुमने नारी का मन जीता

बढाया था तुमने पहला कदम
जीवन भर मिला तुम्हें बस गम

पर नई राह तो दिखला दी
नारी को आज़ादी सिखला दी

तोडा था तुमने इक बंधन
और बदल दिया नारी जीवन

तुमने ही नव-पथ दिखलाया
नारी का परिचय करवाया

तुमने ही दिया नारी को नाम
हे माँ तुझे मेरा प्रणाम

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