Tag Archives: Motivational Hindi Poems

नारी तुझे सलाम: महिला दिवस के सन्दर्भ में हिंदी कविता

नारी तुझे सलाम Women's Day Special Hindi Poem

नारी तुझे सलाम: महिला दिवस के सन्दर्भ में हिंदी कविता – दुनिया भर में हर साल 8 मार्च को महिला दिवस मनाया जाता है। महिला दिवस के नाम से ही जाहिर है कि ये दिन महिलाओं को समर्पित है। महिला दिवस के बहाने हम देश-दुनिया की ऐसी महिलाओं को याद करते हैं जिन्होंने वैश्विक पटल पर अपनी अमिट छाप छोड़ी …

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महिला दिवस पर कविता: पहली नारी

महिला दिवस पर कविता - पहली नारी

मेरा प्रणाम है पहली नारी सीता को जिसने एक सीमा (लक्ष्मण रेखा) को तोडकर भले ही जीवन भर अथाह दुख सहे लेकिन आधुनिक नारी को आजादी का मार्ग दिखा दिया… महिला दिवस पर कविता धन्य हो तुम माँ सीता तुमने नारी का मन जीता बढाया था तुमने पहला कदम जीवन भर मिला तुम्हें बस गम पर नई राह तो दिखला …

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डम डम डमरू डमरू नाथः शिव – महाशिवरात्रि भजन

डम डम डमरू डमरू नाथः शिव - महाशिवरात्रि भजन

डम डम डमरू डमरू नाथः शिव – महाशिवरात्रि भजन – महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जो भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन का प्रतीक है। इस पावन अवसर पर श्रद्धालु भोलेनाथ की आराधना करते हैं और उनसे सुख-समृद्धि, शांति और आशीर्वाद की कामना करते हैं। महाशिवरात्रि का महत्व सिर्फ धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि यह …

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जागो जागो शंकरा: महाशिवरात्रि भजन Sri Sathya Sai Bhajan

जागो जागो शंकरा: महाशिवरात्रि भजन Sri Sathya Sai Bhajan

जागो जागो शंकरा: महाशिवरात्रि भजन – This bhajan ‘Jago Jago Jago Shankara’ urges us to awaken ourselves to the reality that we are indeed nothing but Divine consciousness, reservoirs of auspiciousness, and eternal springs of goodness. जागो जागो शंकरा: महाशिवरात्रि भजन जागो जागो शंकरा जागो जागो साईश्वरा जागो जागो जागो शंकरा हलाहल धार हे परमेशा हे त्रिपुरारी जय पर्थिशा गंगा …

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महाशिवरात्रि भजन: अरुणाचल शिवा साईं शंकरा

महाशिवरात्रि भजन

महाशिवरात्रि भजन अरुणाचल शिवा साईं शंकरा नाचो हे नटराज भस्म भूषण नागाभरणा नाचो हे शिवा राज तांडव प्रिया करा, नटना नटेश्वर, नाचो हे नटराज नाचो हे नटराज दमा दमा दमा दमा डमरू बजावो झना झना झना झना पायलिया धिमिकी धिमिकी धीमी, धिमिकी धिमिकी धीमी, नाचो हे नटराज नाचो हे नटराज महाशिवरात्रि भजन और गानों पर भोलेनाथ की भक्ती में झूम जाएंगे …

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महाशिवरात्रि फिल्म भजन: सुबह सुबह ले शिव का नाम – कर ले बन्दे यह काम

सुबह सुबह ले शिव का नाम: महाशिवरात्रि भजन

महाशिवरात्रि फिल्म भजन: शिव महिमा फिल्म से सुबह सुबह ले शिव का नाम, कर ले बन्दे यह शुभ काम। सुबह सुबह ले शिव का नाम, शिव आयेंगे तेरे काम॥ ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय खुद को राख लपेटे फिरते, औरों को देते धन धाम। देवो के हित विष पी डाला, नील कंठ को कोटि प्रणाम॥ सुबह …

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होकर मगन आया है बसंत: वसंत ऋतु पर कविता

होकर मगन आया है बसंत: विवेल हिरदे

होकर मगन आया है बसंत: माघ महीने की पंचमी तिथि से ऋतुराज बसंत का आगमन होता है। मानव तो क्या पशु-पक्षी तक उल्लास से भर जाते हैं। वसंत पंचमी पर्व भारतीय जनजीवन को अनेक तरह से प्रभावित करता है। प्राचीनकाल से इसे ज्ञान और कला की देवी मां सरस्वती का जन्मदिवस माना जाता है। जो शिक्षाविद भारत और भारतीयता से …

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बसंती हवा: केदार नाथ अग्रवाल

बसंती हवा - केदार नाथ अग्रवाल

बसंती हवा: केदारनाथ अग्रवाल (१ अप्रैल १९११ – २२ जून २०००) प्रमुख हिन्दी कवि थे। १ अप्रैल १९११ को उत्तर प्रदेश के बांदा जनपद के कमासिन गाँव में हनुमान प्रसाद गुप्ता व घसीटो देवी के घर हुआ था। केदार जी के पिताजी स्वयं कवि थे और उनका एक काव्य संकलन ‘मधुरिम’ के नाम से प्रकाशित भी हुआ था। केदार जी …

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जलियाँवाला बाग में बसंत: सुभद्रा कुमारी चौहान

जलियाँवाला बाग में बसंत - सुभद्रा कुमारी चौहान

जलियाँवाला बाग में बसंत: सुभद्रा कुमारी चौहान – Jallianwala Bagh (जलियाँवाला बाग) is a public garden in Amritsar, and houses a memorial of national importance, established in 1951 by the Government of India, to commemorate the massacre of peaceful celebrators including unarmed women and children by British occupying forces, on the occasion of the Punjabi New Year (Baisakhi) on 13 …

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सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा: मुहम्मद इक़बाल की देशप्रेम ग़ज़ल

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा: मुहम्मद इक़बाल की देशप्रेम ग़ज़ल

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा: This great poem was written by Allama Muhammad Iqbal, a great poet-philosopher and active political leader. Iqbal was born at Sialkot, Punjab, in 1877. He descended from a family of Kashmiri brahmins but his grandfather Sahaj Ram Sapru, had to embrace Islam (Reference). In 1904, Iqbal, then a young lecturer at the Government College, …

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