Tag Archives: Human Behaviour Poems for Children

आओ मन की गांठें खोलें: अटल बिहारी वाजपेयी

वाकपटुता कहें, हाज़िरजवाबी कहें या sense of humor कह लें। यह कोई ऐसा गुण नहीं है जिसे राजनीतिक अहर्ताओं में शुमार किया जाता हो। लेकिन यह भी सच है कि इसमें पारंगत नेताओं ने इसका सफल राजनीतिक इस्तेमाल भी किया। दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी की गिनती उनमें बिना किसी शुबहे के की जा सकती है। वह अपनी वाकपटुता से न सिर्फ़ …

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दो अनुभूतियाँ: अटल जी की मानव मनोदशा पर कविताएँ

दो अनुभूतियाँ: अटल बिहारी वाजपेयी

In most human endeavors, there are ups and downs. But in the field of politics, downswings can be brutal and up-swings full of elation and optimism. Two poems of Atal Ji reflect beautifully on this roller coaster. First one appears to have been written in a phase of disillusionment and dejection when the poet’s heart says, “I won’t sing any …

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अपने ही मन से कुछ बोलें: अटल की आत्म चिंतन कविता

अपने ही मन से कुछ बोलें - अटल बिहारी वाजपेयी

Atal Jis poems have special significance. He was leader of a country of one billion people; a seasoned politician who would have seen all that is to be seen on this earth. It is admirable that he retained the sensitivity of heart as a poet too, a member of the rare breed of philosopher kings. I was specially moved by …

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सफलता: ओमप्रकाश बजाज की प्रेरणादायक कविता

सफलता - ओमप्रकाश बजाज

मेहनत से सफलता मिलती है, उचित मूल्य चुकाना पड़ता है। सफलता की सीढ़ी चढ़ने के लिए, ढेरों पसीना बहाना पड़ता है। लगन निष्ठा नियम उत्साहपूर्वक, जो कर्त्तव्य अपना निभाते है। निश्चित ही एक न एक दिन वह, जीवन में सफल हो जाते है। तिकड़म से भी कभी-कभी कुछ लोग, सफलता हतिया ले जाते है। देर-सवेर भांडा फूटने पर मगर, शर्मसार …

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मैं तो झोंका हूँ हवा का: कुमार विश्वास

मैं तो झोंका हूँ हवा का उड़ा ले जाऊँगा: कुमार विश्वास

मैं तो झोंका हूँ हवा का: कुमार विश्वास – Vishwas was born on 10 February 1970 in a middle class family in the town of Pilkhuwa in Uttar Pradesh, where he studied at Lala Ganga Sahay School. His father, Chandra Pal Sharma, was a lecturer at R.S.S. Degree College in Pilkhuwa and his mother, Rama Sharma, was a housewife. Vishwas …

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भये प्रगट कृपाला: तुलसीदास द्वारा रचित श्री राम स्तुति

भये प्रगट कृपाला - गोस्वामी तुलसीदास

भये प्रगट कृपाला, दीन दयाला, कौसल्या हितकारी। हरषित महतारी, मुनि मनहारी, अद्भुत रूप विचारी॥ लोचन अभिरामा, तनु घनस्यामा, निज आयुध भुज चारी। भूषन वनमाला, नयन बिसाला, सोभासिंधु खरारी॥ भये प्रगट कृपाला – भावार्थ: दीनों पर दया करने वाले, कौसल्या के हितकारी कृपालु प्रभु प्रकट हुए। मुनियों के मन को हरने वाले उनके अद्भुत रूप का विचार करके माता हर्ष से …

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गोस्वामी तुलसीदास जी के दोहे हिंदी अनुवाद के साथ

तुलसीदास जी के दोहे

गोस्वामी तुलसीदास जी के दोहे अर्थ सहित (Tulisdas Ke Dohe With Meaning in Hindi) गोस्वामी तुलसीदास (जन्म- 1532 ई. – मृत्यु- 1623 ई.) हिन्दी साहित्य के आकाश के परम नक्षत्र, भक्तिकाल की सगुण धारा की रामभक्ति शाखा के प्रतिनिधि कवि है। तुलसीदास एक साथ कवि, भक्त तथा समाज सुधारक तीनों रूपों में मान्य है। श्रीराम को समर्पित ग्रन्थ श्रीरामचरितमानस वाल्मीकि …

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Population Explosion: Poetry On Over Population

Population Explosion - English Poetry about Population

In biology or human geography, population growth is the increase in the number of individuals in a population. Many of the world’s countries, including many in Sub-Saharan Africa, the Middle East, South Asia and South East Asia, have seen a sharp rise in population since the end of the Cold War. The fear is that high population numbers are putting …

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Overpopulation Poem For Students And Children

Kids poem on Overpopulation in English

Overpopulation occurs when a species’ population exceeds the carrying capacity of its ecological niche. It can result from an increase in births (fertility rate), a decline in the mortality rate, an increase in immigration, or an unsustainable biome and depletion of resources. Moreover, it means that if there are too many people in the same habitat, people are limiting available …

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जनसंख्या: Hindi Poem about Over Population

Hindi Poem about Over Population जनसंख्या

भारत की अनेक समस्याओं का कारण यहाँ की तेजी से बढती हुई Population है। स्थिति इतनी भयावह हो गई है कि इसे सख्या विस्फोट की संज्ञा दी जाती है। अर्थशारित्रयों का मत है कि भारत के लिए इस बढती हुई जनसंख्या की जरूरतो को पूरा करने के लिये पर्याप्त साधन नहीं हैं। आज हमारी जनसख्या लगभग एक अरब पाच करोड …

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