वह सुधर गया: एक घर की कहानी जहां बाप-बेटा दोनों शातिर चोर

वह सुधर गया: एक घर की कहानी जहां बाप-बेटा दोनों शातिर चोर

पता नहीं किसने उसका नाम रखा चक्कू। उसका नाम इसलिए मशहूर हो गया कि वह चोरी करने लगा था। चक्कू चोर कई बार पकड़ा गया, उसको सजा भी हुई, पर वह सुधरा नहीं। वह कई गलत काम करने लगा, जिनमें एक था रोज शराब पीना। उसकी पत्नी, बच्चे उसकी इस बुरी आदत से परेशान थे।

उसका बेटा 12-13 वर्ष का हुआ तो उसे भी उसने लोगों के पैसे चुराना सिखा दिया। वह भी उसकी तरह पैसे चुराने लगा। बेटा चोरी करके रुपए लाता और चक्कू उससे छीन लेता। इससे सबसे ज्यादा दुखी थी चक्कू की पत्नी पर वह कुछ नहीं कर सकी।

वह सुधर गया: बाप-बेटा दोनों शातिर चोर

चक्कू को तो उसके काम की सजा मिलती ही, कई बार बेटा भी पिटकर, मार खाकर, रोता हुआ घर आता था। यह देख कर उसकी मां आंसू बहाती, पर चक्कू कहता – “इस धंधे में पिटकर ही पक्के बनते हैं“।

एक दिन बेटा घर आया। चक्कू उसके इंतजार में ही बैठा था। उसने देखा, बेटा उदास है। चक्कू समझा आज भी पिटकर आया है पर बेटे की जेब भारी देखकर उसने कुछ नहीं पूछा। सीधे जेब में हाथ डाला और उसमें से दस-दस के पांच नोट निकाल लिए। अरे वाह! पचास रुपए। आज तो पेट भर कर दारू पिऊंगा।

पर यह क्या? बेटे ने हाथ मारा और सारे रुपए वापस छीन लिए। चक्कू के लिए यह नई बात थी। एक बार तो वह चौंक गया। वह दोबारा छीनने को हुआ तो बेटा बोला, “नहीं… नहीं, इन रुपयों से मैं आपको शराब पीने जैसा गलत काम नहीं करने दूंगा। मुझे ये रुपए चुराने का बहुत अफसोस है। जिसके रुपए चुराए, उसे रोते हुए देख कर मुझे बहुत दुख हुआ। मैंने ये उसे वापस करने की सोची थी पर डर गया। लोग मुझे चोर-चोर कह कर बुरी तरह पीटेंगे क्योंकि यह चोरी मैंने मेले में की है। वहां बहुत लोग थे।”

“जानते हो ये रुपए मैंने कहां से चुराए हैं? मेरे से भी छोटे एक बच्चे की जेब से। वह रोते हुए बार-बार कह रहा था – ये रुपए हम पांच भाई-बहनों के थे। मुझे इसलिए दिए थे कि मैं उनके लिए मेले से कुछ अच्छा सा खरीद कर लाऊं। पता नहीं, चोर कौन है? पर उसे मैं कहना चाहता हूं कि मेरे दस रुपए रख लो, मेरे दो भाई और दो बहनों के चालीस लौटा दो। वरना घर जाने पर वे मुझ पर नाराज होंगे और फिर कभी मुझ पर विश्वास नहीं करेंगे। “नहीं… नहीं, बच्चों के पैसे मैं आपको शराब पीने के लिए नहीं दूंगा”।

चक्कू एक बार तो रुक गया पर बाद में उसने सारे रुपए छीन लिए और घर से बाहर चला गया।

सब दुखी हो गए उस दिन। शाम को किसी ने खाना नहीं खाया। सब सोच रहे थे कि चक्कू शराब के नशे में लड़खड़ाता घर आएगा पर जब वह वापस आया तो घर वाले हैरान हो गए। उसने शराब नहीं पी रखी थी। काफी उदास-उदास था।

घर आते ही वह अपने बेटे के पास बैठ गया। कुछ देर बाद बोला, “बेटा, आज तेरे लाए रुपयों से मैंने शराब नहीं पी। उनके अलावा मेरे पास कोई रुपया पैसा नहीं था, इसलिए मैं आज बिना पिए हूं। कल भी बिना पिए घर आऊंगा। अब कभी शराब नहीं पिऊंगा।”

“मैंने तुम्हें चोरी जैसा गलत काम सिखाया था। आज तुम्हारी यह बात सुनी कि मासूम बच्चे के रुपयों से शराब पीने जैसा गलत काम नहीं करना चाहिए। मैंने तो कभी यह सोचा भी नहीं था। इसलिए तुमसे गलत काम करवाता रहा और चोरी के जो पैसे लाता, वे गलत आदत
पूरी करने में लगाता रहा। पर आज तूने मुझे इसका उल्टा सिखा दिया है। आज से मैं तुम्हें गुरु मानता हूं। चोरी जैसा गलत काम भी मैं कभी नहीं करूंगा। चोर बनने से पहले मैं ईंट भट्टा पर ईंटें बनाता था और अब भी वही काम फिर से शुरू करूंगा। मैं नहीं समझता कि तुम्हें यह बताने की जरूरत है कि तुम क्या करोगे।”

यह सुनकर बेटे की सारी उदासी, सारी मायूसी दूर हो गई। बेटा बोला, “पिता जी, चोरी करना मुझे आपने ही सिखाया था। आप अपने को पक्का चोर मानते हुए भी यह गलत काम छोड़ रहे हैं तो मैं क्यों नहीं छोड़ंगा। मैं ये पचास रुपए लेकर मेले-बाजार में जाऊंगा। उस बच्चै की तलाश कर उसे वापस करूंगा। यदि वह नहीं मिला तो मेले में उस जैसे मासूम, उदास बच्चों को देकर उन्हें खुश करूंगा।” इतना कहते हुए वह और उसके पिता एक-दूसरे के गले लग गए।

यह देख कर चक्कू की पत्नी की आंखों से खुशी के आंसू बहने लगे।

~ ‘वह सुधर गया‘ story by ‘गोविंद शर्मा

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