Paramahansa Yogananda Quotes in Hindi परमहंस योगानंद के अनमोल विचार

परमहंस योगानंद के अनमोल विचार

Born: 5 January 1893, Gorakhpur
Died: 7 March 1952, Millennium Biltmore Hotel, Los Angeles, California, United States
Guru: Swami Sri Yukteswar Giri
Nationality: American, Indian

परमहंस योगानन्द बीसवीं सदी के एक आध्यात्मिक गुरू, योगी और संत थे। उन्होंने अपने अनुयायियों को क्रिया योग उपदेश दिया तथा पूरे विश्व में उसका प्रचार तथा प्रसार किया। योगानंद के अनुसार क्रिया योग ईश्वर से साक्षात्कार की एक प्रभावी विधि है, जिसके पालन से अपने जीवन को संवारा और ईश्वर की ओर अग्रसर हुआ जा सकता है। योगानन्द प्रथम भारतीय गुरु थे जिन्होने अपने जीवन के कार्य को पश्चिम में किया।

  • सबसे अच्छे तरीके वे होते हैं जो लाइफ एनर्जी को पुन: अंदरूनी चिकित्सा आरम्भ करने में मदद करते हैं।
  • अपना सर्वश्रेष्ठ करो और फिर आराम करो।
  • एक टूटा हुआ माइक्रोफोन सन्देश प्रसारित नहीं कर सकता है, इसी तरह एक बेचैन मन भगवान् की प्रार्थना नहीं कर सकता।
  • शांति भगवान् की वेदी है, वो परिस्थिति जिसमे ख़ुशी मौजूद होतीहै।
  • एक नश्वर प्राणी के रूप में आप सीमित हैं, लेकिन भगवान् के बच्चे के रूप में आप असीमित हैं… अपना ध्यान भगवान् पर केन्द्रित करें, और आपको जो चाहिए वो शक्तियां किसी भी दिशा में उपयोग करने के लिए मिल जायेंगी।
  • जब भी आप कुछ निर्मित करना चाहें, बाह्य स्रोत पर निर्भर मत करें – अन्दर गहराई तक जाइए और अनंत स्रोत को खोजिये।
  • सफलता की एक और योग्यता है कि हम सिर्फ अपने लिए ही सामंजस्यपूर्ण और लाभकारी परिणाम नहीं लाते, बल्कि उसके लाभ औरों से भी साझा करते हैं।
  • अगर आप दुखी होना चाहते हैं, तो दुनिया में कोई भी आपको खुश नहीं कर सकता। लेकिन अगर आप खुश रहने का मन बना लें तो इस पृथ्वी पर कोई भी और कुछ भी आपसे वो ख़ुशी नहीं छीन सकता।
  • लाखों लोग कभी खुद का विश्लेषण नहीं करते। मानसिक रूप से वे अपने वातावरण की फैक्ट्री के मैकेनिकल प्रोडक्ट होते हैं, नाश्ता, दोपहर का खाना, रात का खाना, काम करना और सोना, मनोरंजन के लिए इधर-उधर जाना, बस इन्ही चीजों में उलझे हुए होते हैं। वे नहीं जानते कि वे क्या और क्यों तलाश रहे हैं, न ये जानते हैं कि क्यों उन्हें कभी पूर्ण प्रसन्नता और स्थायी संतुष्टि का एहसास नहीं होता। आत्म-विश्लेषण से बच कर, लोग वातावरण के मुताबिक रोबोट बने रहते हैं। सच्चा आत्म-विश्लेषण प्रगति की सबसे बड़ी कला है।
  • जैसे मैं औरों को प्रेम और सद्भाव देता हूँ, मैं भगवान् का प्रेम प्राप्त करने का प्रवाह खोल देता हूँ।
  • लहरें सागर की तरह ही हैं, हालांकि वे पूरा सागर नहीं हैं। इसलिए सृष्टि के प्रत्येक लहर आत्मा के अनन्त महासागर का एक हिस्सा है। सागर लहरों के बिना रह सकता है, लेकिन लहरें सागर के बिना नहीं रह सकतीं।
  • अगर आपका मन मजबूत है और आप उसमे एक दृढ संकल्प स्थापित कर देते हैं तो आप अपना भाग्य बदल सकते हैं।
  • केवल अपने हृदय की ख़ुशी आत्मा को संतुष्ट नहीं कर सकती; हमें अपनी ही ख़ुशी के लिए कोशिश करनी चाहिए कि हम उसमे दूसरों की ख़ुशी भी शामिल कर सकें।
  • खुद को बदलिए और दुनिया बदलने में आपका जो हिस्सा है वो आपने पूरा कर दिया है।
  • प्रेम भगवान् के लिए गाया आत्मा का गीत है।

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