Hindi Slogans for World Blood Donor Day विश्व रक्तदान दिवस

विश्व रक्तदान दिवस पर नारे विद्यार्थियों के लिए

विश्व रक्तदान दिवस पर नारे: विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा हर साल 14 जून को ‘रक्तदान दिवस‘ मनाया जाता है। वर्ष 1997 में संगठन ने यह लक्ष्य रखा था कि विश्व के प्रमुख 124 देश अपने यहाँ स्वैच्छिक रक्तदान को ही बढ़ावा दें। मकसद यह था कि रक्त की जरूरत पड़ने पर उसके लिए पैसे देने की जरूरत नहीं पड़ना चाहिए।

विश्व रक्तदान दिवस पर नारे विद्यार्थियों के लिए

विश्व रक्तदान दिवस पर नारे:

  • कतरा कतरा ख़ून का, जीवन की रसधार
    ख़ून अपना दे कर करो, प्राणों का संचार
  • रक्त बिना नहिं जी सके, इक दिन भी इन्सान
    रक्त से अपने कीजिये, यारों जीवन दान
  • रक्तदान इक फ़र्ज़ है, रक्तदान इक धर्म
    रक्तदान है दोस्तो, सबसे पावन कर्म
  • मानवता के मंच से, कर दो यह ऐलान
    समय समय पर हम सभी, रक्त करेंगे दान
  • तेरा पंथ युवक परिषद् का पावन अभियान
    सत्रह सेप्टेम्बर को हमें, करना है रक्तदान
  • रक्तदान से रोक लो, मरणासन्न की मौत
    घर घर में जलती रहे, सबकी जीवन जोत
  • धन्य धन्य वह कुल हुआ, धन्य हुआ इन्सान
    जो औरों के वास्ते, करता शोणित दान
  • रक्त कहो, शोणित कहो, लहू कहो या ख़ून
    सबका मतलब एक है, जीवन का हनिमून
  • रक्तदान आसान है, कठिन नहीं है यार
    14 जून के दिन हमें, रहना है तैयार
  • हँसते हँसते कीजिये, रक्तदान का काम
    ताकि दुखियों को मिले, जीवन का आराम
  • रक्तदान की राह पर, निकला पूरा देश
    सारे जग में भेज दो, भारत का सन्देश
  • ब्लड डोनेशन कीजिये, समय समय पर आप
    मन में आये पुण्यता, तन होगा निष्पाप
  • किसी ज़रूरतमंद को, देकर अपना ख़ून
    खूब खिलाओ जगत में, जीवन के परसून
  • सत्रह सेप्टेम्बर रहे, भैया सबको याद
    रक्तदान उत्सव बने, प्रसरेगा आह्लाद
  • पल दो पल का काम है, रक्तदान श्रीमान
    दिनचर्या में आएगा, नहिं तनिक व्यवधान
  • रक्तदान इक यज्ञ है, मानवता के नाम
    आहूति अनमोल है, लगे न कोई दाम
  • रक्तदान इक फ़र्ज़ है, रक्तदान इक धर्म
    रक्तदान है दोस्तो, सबसे पावन कर्म
  • तन होगा निष्पाप,स्वस्थ रहेंगे आप
    सौलह आने सत्य है अलबेला की बात

भारत में रक्तदान की स्थिति

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक के तहत भारत में सालाना एक करोड़ यूनिट रक्त की ज़रूरत है लेकिन उपलब्ध 75 लाख यूनिट ही हो पाता है। यानी क़रीब 25 लाख यूनिट रक्त के अभाव में हर साल सैंकड़ों मरीज़ दम तोड़ देते हैं। राजधानी दिल्ली में आंकड़ों के मुताबिक यहां हर साल 350 लाख रक्त यूनिट की आवश्यकता रहती है, लेकिन स्वैच्छिक रक्तदाताओं से इसका महज 30 फीसदी ही जुट पाता है। जो हाल दिल्ली का है वही शेष भारत का है। यह अकारण नहीं कि भारत की आबादी भले ही सवा अरब पहुंच गयी हो, रक्तदाताओं का आंकड़ा कुल आबादी का एक प्रतिशत भी नहीं पहुंच पाया है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत में कुल रक्तदान का केवल 59 फीसदी रक्तदान स्वेच्छिक होता है। जबकि राजधानी दिल्ली में तो स्वैच्छिक रक्तदान केवल 32 फीसदी है। दिल्ली में 53 ब्लड बैंक हैं पर फिर भी एक लाख यूनिट रक्त की कमी है। वहीं दुनिया के कई सारे देश हैं जो इस मामले में भारत को काफ़ी पीछा छोड़ देते हैं। मालूम हो हाल में राजशाही के जोखड़ से मुक्त होकर गणतंत्र बने नेपाल में कुल रक्त की ज़रूरत का 90 फीसदी स्वैच्छिक रक्तदान से पूरा होता है तो श्रीलंका में 60 फीसदी, थाईलेण्ड में 95 फीसदी, इण्डोनेशिया में 77 फीसदी और अपनी निरंकुश हुकूमत के लिए चर्चित बर्मा में 60 फीसदी हिस्सा रक्तदान से पूरा होता है।

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