बाल-कविताएँ [4] – आलू: ओम प्रकाश बजाज
हर जगह है आलू छाया।
चाट में आलू, पकौड़ी में आलू।
आलू गोभी, आलू मेथी, आलू टमाटर,
हर सब्जी में है आलू हाजिर।
आलू का परांठा सब को भाता,
हर कोई इसे स्वाद से खाता।
आलू के चिप्स भांति-भांति के आते,
बच्चों की पहली पसंद माने जाते।
भून कर तल कर भी इसे खाते,
आलू का अचार भी लोग बनाते।
बाल-कविता [5] – फूल: ओम प्रकाश बजाज
अनगिनत रंगों के आते फूल,
जीवन में रंग भर देते फूल।
बगिया में रंग-बिरंगे फूल देख कर,
मन प्रसन्न हो जाता है।
फूलों पर इतराती तितलियां देख,
शरीर पर नशा-सा छा जाता है।
हर फूल की अपनी महक है,
अपना रंग है अपनी छटा है।
रंग-रंग के फूल अपनी सुगंध से,
हमारा मन खुशी से भर देते हैं।
हमारी प्यारी-सी इस दुनिया को,
और भी अधिक मोहक बना देते हैं।
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