नूतन वर्ष: राजीव रंजन प्रसाद

नूतन वर्ष: राजीव रंजन प्रसाद

नूतन वर्ष: राजीव रंजन प्रसाद – यानि नए साल को हर कोई अपने अपने तरीके से मनाता है, लेकिन सबके लिए नया साल नए उम्मीदे ले आता है, जो की बहुत ही आनंदित करने वाला होता है, तो ऐसे मे नया साल का उत्सव हर कोई सुंदर और शानदार तरिके से मनाते है, पूरी दुनिया मे 31 दिसंबर की रात मे जैसे ही घड़ी की सूईया ठीक 12 बजे पर पहुचती है, सारी दुनिया आतिशबाज़ी और पटाखो की गूंज से भर जाता है, हर कोई अपनों को नए साल के लिए शुभकामनाए देने लगता है।

इस आधी रात को हर रोज जहा सोती है, तो नए साल के स्वागत के लिए दुनिया के ज्यादा से ज्यादा लोग जगे रहते है, और नए साल के स्वागत के उत्सुक रहते है, पूरी दुनीया एक साथ एक जश्न के माहौल मे डूब जाती है, जो की नया साल सभी को एक सूत्र मे पिरो देता है, जो की नए साल की यही सबसे बड़ी खूबसूरती भी है, जो की सभी को एक साथ एक उत्सव के जश्न मे डुबो देती है।

इसके अलावा बड़े बड़े लोग अपने अपने तरीको से अपने फैन को नए साल की शुभकामनाए देते है, पूरा सोशल मीडिया नये साल की शुभकामनाओ से भर जाता है, तो बहुत से स्कूलो मे नये साल के पर्व पर विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते है, जिसमे स्कूल के बच्चे बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते है, और एक दूसरे के साथ नये साल को मनाते है।

नूतन वर्ष: राजीव रंजन प्रसाद

नवीनता के पंख होते हैं
और वर्ष पलों के पंखों से
उड़ता थामे आता है
थरिया भर आसमान सितारों भरा
मेरी आँखों की धरती में टाँक जाता है चंदा
कि धरती में खुशबू भर जाएगी अबके बरस
कि उम्मीद कठपुतली न रहेगी बल्कि नाचेगी
कि आशा बाँसुरी बजाएगी
कि मन के पास धरती होगी
और धरती के पास सोना
और मेरे स्वजन
हमारी आत्मीयता का विश्वास भी तो
फूलों से लद जाएगा
अंतरंगता की नदी का कोकिल कलरव
तार बन गूथ देगा हम तुम को
और मधुरता आसमान से इतनी ऊँची हो लेगी
जितनी ऊँची होती है बुजुर्गों की दुआ।
नवीनता में पुरातनता को अलविदा कहना है
लेकिन अनुभव जीवन का गहना है
तो फिर हर नवीन खुशियों में
जीवन की अदाओं का साथ भर देंगे
अपने दिल इतने पास कर देंगे
आपको अपने मन में घर देंगे
नवीनता इसलिए मुबारक हो
कि सोच के मौसम अब कि बदलेंगे
मुझको आशा है हर ग़लतफ़हमी
अब धुआँ न बन के फैलेगी।
बन के खुशबू हमारे मन के गुल कहते हैं
सब के साथ अपनी खुशियों का पर्वत हो
नूतन वर्ष स्वागत हो॥

∼ “नूतन वर्ष” Hindi poem by ‘राजीव रंजन प्रसाद

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