ऐसा नियम न बाँधो - आनंद शर्मा

ऐसा नियम न बाँधो – आनंद शर्मा

हर गायक का अपन स्वर है
हर स्वर की अपनी मादकता
ऐसा नियम न बाँधो
सारे गायक एक तरह से गाएँ।

कुछ नखशिख सागर भर देते
कुछ के निकट गगरियाँ प्यासी
कुछ दो बूँद बरस चुप होते
कुछ की हैं बरसातें दासी

हर बादल का अपना जल है
हर जल की अपनी चंचलताा
ऐसा नियम न बाँधो
सारे बादल एक तरह चुक जाएँ।

सुख जीवन में अतिथि मात्र है
इस घर का स्वामी तो दुख है
आँसू के सौ सौ परदों में
मुस्कानों का नन्हा मुख है।

तुम आए तो इससे बढ़कर
क्या घटना होगी जीवन में
इतना निकट न आओ पर
मन सुख का आदी हो जाए।

∼ आनंद शर्मा

Check Also

Dussehra Facebook Covers

Dussehra Facebook Covers: Vijayadashami Social Media Banners & Posters

Dussehra Facebook Covers: Dussehra, also known as Vijayadashami, is a major Indian festival celebrated on …