अध्ययन के निष्कर्षों से पता चला है कि 100 मिलीग्राम/डी.एल. की तुलना में एल.डी.एल. कोलैस्ट्रोल का स्तर जिन लोगों में 100-159 मिलीग्राम/डी.एल. तथा उनमें दिल की बीमारी से मृत्यु का जोखिम 30 से 40 प्रतिशत अधिक हो जाता है जबकि 160 मिलीग्राम/डी.एल. या उससे अधिक के स्तर वाले लोगों में यह खतरा 70 से 90 प्रतिशत बढ़ जाता है।
अमेरिका में टैक्सास विश्वविद्यालय में हुए इस अध्ययन से जुड़े शोएब अब्दुल्ला कहते हैं, “हमारे अध्ययन से पता चलता है कि दिल की बीमारी का जोखिम कम रहने पर भी ‘बैड कोलैस्ट्रोल’ की वजह से पैदा होने वाला समय पूर्व मृत्यु का जोखिम खत्म नहीं होता है।”
युवावस्था में अधिक कोलैस्ट्रोल का मतलब है कि उम्र के साथ दिल के रोग का जोखिम और बढ़ता जाएगा।
अध्ययन में 36,375 स्वस्थ युवाओं को शामिल किया गया जो मधुमेह या दिल की बीमारी से मुक्त थे। युवाओं पर 27 वर्ष तक निगरानी रखी गई थी। इनमें से 1,086 की मौत दिल की धमनियों के रोगों से हुई जबकि 598 की मौत दिल की अन्य समस्याओं से हुई।
विशेषज्ञों के अनुसार, “जिन लोगों में दिल के रोग का जोखिम कम हो, उन्हें भी एल.डी.एल. कॉलैस्ट्रोल का स्तर जितना संभव हो सके कम रखने के लिए अपने आहार पर ध्यान देना और नियमित व्यायाम को भी जीवनशैली का हिस्सा बनाना चाहिए। कोशिश करें कि एल.डी.एल. कॉलैस्ट्रोल 100 मिलीग्राम/डी.एल. से कम ही रहे।”
साथ ही सैचुरेटेड फैट (संतृप्त वसा) का सेवन सीमित रखना, वजन पर नियंत्रण, धूम्रपान से परहेज और एरोबिक एकसरसाइज अधिक करना भी इस जोखिम को कम कर सकते हैं।
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