Poems For Kids

Poetry for children: Our large assortment of poems for children include evergreen classics as well as new poems on a variety of themes. You will find original juvenile poetry about trees, animals, parties, school, friendship and many more subjects. We have short poems, long poems, funny poems, inspirational poems, poems about environment, poems you can recite

लो आ गयी लोहड़ी वे: जावेद अख्तर

लो आ गयी लोहड़ी वे - जावेद अख्तर

लो आ गयी लोहड़ी वे,बना लौ जोड़ी वे,कलाई कोई यू थामो, ना जावे छोड़ी वे,ना जावे छोड़ी वेछूठ ना बोली वे,कुफर ना टोली वे,जो तुने खायी थी कसमे, इक इक तोड़ी वे,इक इक तोड़ी वेलो आ गयी लोहड़ी वे,बना लो जोड़ी वे…तेरे कुर्बान जावा, तेरी मर्ज़ी जान जावा,तोह हर बात मान जावा, तेरी सोनिये…ओय-ओय-ओय तेरे कुर्बान जावातेनु मै जान-दिया, खूब …

Read More »

मकई दा दाना, आना ले के जाना: लोहड़ी लोक गीत

Lohri Folk Song मकई दा दाना, आना ले के जाना

मकई दा दाना, आना ले के जाना “Mukai da dana, Aana lei ke janahulle hulareasi ganga chalesas sora chalejeth jathani chaledyor darani chalepairi shaunkan chalihulle hulareasi ganga pohnchesas sora pohnchejeth jathani pohnchedyor darani pohnchepairi shaunkan pohnchihulle hulareasi ganga nahte shava or hullejeth jathani nahtedyor darani nahtepairi shaunkan nahtiihulle hulareshaunkan paili paurishaunkan duji paurishaunkan tiji paurimaiti dhakka dittashaukan vichhe rud gayihulle …

Read More »

सुंदर मुंदरिये हो, तेरा कौन बेचारा हो: लोहड़ी लोक गीत

Lohri Folk Song सुंदर मुंदरिये हो, तेरा कौन बेचारा हो

सुंदर मुंदरिये हो, तेरा कौन बेचारा होदुल्ला भट्टी वाला हो, दुल्ले ती विआई हो,शेर शकर पाई हो, कुड़ी दे जेबे पाई हो,कुड़ी कौन समेटे हो, चाचा गाली देसे होचाचे चुरी कुटी हो, जिम्मीदारा लूटी हो,जिम्मीदार सुधाये हो, कुड़ी डा लाल दुपटा हो,कुड़ी डा सालू पाटा हो, सालू कौन समेटे हो,आखो मुंडियों ताना ‘ताना’, बाग़ तमाशे जाना ‘ताना’,बागों मनु कोडी लबी …

Read More »

हुल्ले नी माइ हुल्ले दो बेरी पत्ता झुल्ले: लोहड़ी लोक गीत

Lohri Folk Song हुल्ले नी माइ हुल्ले दो बेरी पत्ता झुल्ले

Lohri is a popular winter time Punjabi folk festival, celebrated primarily by Sikhs and Hindus from the Punjab region in the northern part of Indian subcontinent. The significance and legends about the Lohri festival are many and these link the festival to the Punjab region. Many people believe the festival commemorates the passing of the winter solstice. Lohri marks the …

Read More »

हैप्पी न्यू इयर: सरदार टूक टूक

Happy New Year Funny Hindi Poem हैप्पी न्यू इयर

हैप्पी न्यू इयर: सरदार टूक टूक – नव वर्ष का यह उत्सव पूरी दुनिया में बड़ी ही धूमधाम और हर्षोल्लास से मनाया जाता है। सभी लोगों का मानना है कि नया साल हमेशा नई उम्मीदें और खुशियां लेकर आता है। इसलिए सभी लोग नए साल के अवसर पर खुशी से इसका स्वागत करते है। सभी लोग 31 दिसंबर की रात …

Read More »

नया साल मुबारक: घनश्याम दास आहूजा की नव वर्ष पर हिंदी कविता

नया साल मुबारक: घनश्याम दास आहूजा की नव वर्ष पर हिंदी कविता

नया साल मुबारक: नया साल हमें नई परियोजनाएं शुरू करने के लिए प्रेरित करता है और हमें अपना जीवन नए उत्साह और आनंद के साथ जीने की ऊर्जा देता है। नए साल में हम पिछले साल की अपनी गलतियों से सीखते हैं, नया संकल्प या शपथ लेते हैं और पूरी ऊर्जा के साथ अपने काम को पूरा करने में लग …

Read More »

ऐसा नया साल: मनोज भावुक की नव वर्ष के विषय पर बेहतरीन कविता

ऐसा नया साल: मनोज भावुक की नव वर्ष के विषय पर बेहतरीन कविता

ऐसा नया साल: मनोज भावुक (born 2 January 1976) भोजपुरी में लिखने वाले एक भारतीय कवि, अभिनेता, टेलीविजन प्रस्तुतकर्ता और पटकथा लेखक हैं, जो भोजपुरी सिनेमा में सक्रिय हैं। उन्हें फिल्मफेयर और फेमिना भोजपुरी आइकॉन द्वारा “साहित्य में उत्कृष्ट योगदान” की श्रेणी में सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने कई पुरस्कृत पुस्तकें लिखी हैं। वह भोजपुरी भाषा और साहित्य को …

Read More »

साल आया है नया: हुल्लड़ मुरादाबादी की हास्य कविता

साल आया है नया - हुल्लड़ मुरादाबादी

Hullad Moradabadi (29 May 1942 – 12 July 2014) was an Indian poet, humorist and satirist of Hindi language. He had authored several Hindi books including Itni uchi mat chodo, kya karegi chandni, Ye ander ki bat hai, Triveni and Hullad ka Hullad. He was a poet of Hindi Kavi sammelan. Born in Gujranwala, now in Pakistan as Susheel Kumar …

Read More »

वीर रस की कविता: मुझे दिसंबर भी याद है – मुझे साहिबजादे भी याद हैं

वीर रस की कविता: मुझे दिसंबर भी याद है - मुझे साहिबजादे भी याद हैं

वीर रस की कविता पढ़कर आप हिंदी भाषा के महत्व को आसानी से जान पाएंगे, जिसके बाद आप अपनी मातृभाषा पर गर्व की अनुभूति कर पाएंगे। कविता ही समाज का परिचय साहस से करवाती है, जिन्हें पढ़कर मानव का शौर्य जागृत हो जाता है। विद्यार्थी जीवन में विद्यार्थियों को अपना जीवन बेहतर बनाने के लिए वीर रस की कविता अवश्य …

Read More »

काका की अमरीका यात्रा – काका हाथरसी

काका की अमरीका यात्रा - काका हाथरसी

काका की अमरीका यात्रा काका कवि पाताल को चले तरुण के संग अंग-अंग में भर रहे, हास्य व्यंग के रंग हास्य व्यंग के रंग, प्रथम अमरीका आए नगर-नगर में हंसी-ख़ुशी के फूल खिलाये कविता सुनकर मस्त हो गए सबके चोला कोका-कोला पर चढ़ बैठा काका-कोला। ठहरे जिन-जिन घरों में, दिखे अनोखे सीन बाथरूम में भी वहां, बिछे हुए कालीन बिछे …

Read More »