जी नही चाहता कि, नेट बंद करू

जी नही चाहता कि, नेट बंद करू

जी नही चाहता कि,
नेट बंद करू!
अच्छी चलती दूकान का,
गेट बंद करू!
हर पल छोटे – बड़े,
प्यारे-प्यारे मैसेज,
आते है!
कोई हंसाते है,
कोई रूलाते है!
रोजाना हजारों,
मैसेज की भीड़ में,
कभी-कभी अच्छे,
मैसेज भी छूट जाते है!
मन नही मानता कि ,
दोस्तो पर कमेंट बंद करू!
जी नही चाहता कि,
नेट बंद करू!
प्रात: सायं करते है,
सब दोस्त नमस्कार!
बिना स्वार्थ करते है,
एक दूजे से प्यार!
हर तीज त्यौहार पर,
मिलता फूलो का उपहार!
नेट बंद करने की,
सोच है बेकार!
दिल नही करता कि,
दोस्तो की ये भेट बंद करू!
जी नही चाहता कि,
नेट बंद करू!

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