फार्म हाउस बनाएं वास्तु के अनुसार

फार्म हाउस बनाएं वास्तु के अनुसार

आजकल शहरों में बढ़ते हुए प्रदूषण, शोरगुल, भीड़-भाड़, तनाव इत्यादि से थोड़ी राहत पाने के लिए शहरी लोगों में सप्ताहांत की छुट्टियां मनाने शहर के आस-पास के फार्म हाउस अर्थात् देहाती रिसोर्ट में जाने का प्रचलन बहुत बढ़ता जा रहा है जहां खेलने-कूदने, तैरने, खाने-पीने व मौज मस्ती की सभी आधुनिक सुख-सुविधाएं उपलब्ध रहती हैं।

यदि फार्म हाउस का निर्माण करते समय वास्तुशास्त्र के निम्नलिखित साधारण नियमों का पालन किया जाए तो छुट्टियों का मजा लूटने के लिये वहां आने वाले ग्राहकों को खूब आनंद आएगा, वे वहां बार-बार आना चाहेंगे। साथ ही फार्म हाउस के मालिक को अपने इंवेस्टमेंट का रिटर्न भी बहुत अच्छा मिलेगा।

  • फार्म हाउस ऐसी जगह बनाए या खरीदें, जिसके उत्तर-पूर्व में गहरे गड्ढे, तालाब, नदी इत्यादि और दक्षिण व पश्चिम में ऊंचे-ऊंचे टीले व पहाडि़यां हों। ऐसे स्थान पर फार्म हाउस आपकी प्रसिद्धि और समृद्धि के लिए वरदान सिद्ध होगा।
  • अच्छे आर्थिक लाभ के लिए वह जमीन जहां आप फार्म हाउस का निर्माण करना चाहते हैं तो उस जमीन का आकार वर्गाकार, आयताकार होना चाहिए। जमीन अनियमित आकार की न हो। जमीन का दक्षिण पश्चिम कोना 900 का होना चाहिए, साथ ही जमीन पर निर्माण कार्य करते समय ध्यान रखना चाहिए कि उत्तर व पूर्व दिशा में ज्यादा खुली जगह छोड़नी चाहिए।
  • फार्म हाउस की जमीन की उत्तर, पूर्व एवं ईशान दिशा का दबा, कटा एवं गोल होना बहुत अशुभ होता है, इससे फार्म हाउस के मालिक को विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसके विपरीत जमीन की इन दिशाओं का बड़ा होना बहुत शुभ होता है। यदि जमीन की यह दिशाएं दबी, कटी या गोल हों, तो इन्हें शीघ्र बढ़ाकर या घटाकर समकोण करके इसके अशुभ परिणामों से बचना चाहिए।
  • फार्म हाउस में स्वीमिंग पूल, कृत्रिम जलप्रपात, तालाब इत्यादि का निर्माण उत्तर या पूर्व दिशा में करवाना चाहिए। कुंआ या बोरिंग ईशान कोण में होना चाहिए। इसके विपरीत अन्य किसी भी दिशा में इनका होना अशुभ होता है। फार्म हाउस के मध्य में स्वीमिंग पूल का निर्माण भयंकर आर्थिक कष्ट देता है।
  • फार्म हाउस की अच्छी सफलता के लिए उत्तर, ईशान व पूर्व का भाग दक्षिण, नैऋत्य व पश्चिम भाग की तुलना में नीचा होना चाहिए। जमीन का इन दिशाओं में ऊंचा होना दुर्भाग्य को आमंत्रित करता है। जमीन का ईशान कोण या उत्तर पूर्व दिशा ऊंची हो तो वहां की मिट्टी निकालकर दक्षिण पश्चिम दिशा या नैऋत्य कोण में डालकर जमीन को समतल कर देना चाहिए।
  • फार्म हाउस का मुख्य द्वार पूर्वमुखी व दक्षिणमुखी भूखण्ड में बांए तरफ और पश्चिम व उत्तरमुखी भूखण्ड में दाँए तरफ होना शुभ होता है।
  • फार्म हाउस के मुख्य द्वार के सामने कोई बाधा होती है तो उसे द्वार वेध कहा जाता है। जैसे बिजली का खंभा, स्तम्भ, वृक्ष इत्यादि। यह बाधा अशुभ होती है, जो आपके फार्म हाउस के विकास में रुकावटें पैदा करती हैं। यदि फार्म हाउस और बाधा के मध्य सार्वजनिक सड़क हो, तो यह दोष खत्म हो जाता है। फार्म हाउस के मुख्य द्वार के दांए-बांए व पीछे ऐसी बाधा हो तो यह दोष नहीं होता है।
  • अपनी आस्था के अनुसार, फार्म हाउस के मुख्य द्वार के बाहर मांगलिक प्रतीकों को प्रदर्शित करना चाहिए जैसे स्वास्तिक, ऊँ, त्रिशूल, क्रास इत्यादि। इससे सौभाग्य में वृद्धि होती है।
  • फार्म हाउस कभी भी ऐसे स्थान पर न बनाए जहां ऊपर से हाईटेंशन बिजली की तारें निकलती हों। इनसे निकलने वाली इलेक्ट्रो मैगनेटिक तरंगे जो कि काफी खतरनाक होती हैं वहां रहने वालों के स्वास्थ्य को प्रभावित करेंगी।
  • बिजली के मीटर, ट्रांसफार्मर, जेनरेटर अन्य विद्युत उपकरणों की व्यवस्था आग्नेय कोण में ही करनी चाहिए।
  • फार्म हाउस में रसोईघर का भी निर्माण आग्नेय कोण में करना चाहिए व डाइनिंग हाल पश्चिम में रखना चाहिए।
  • कैंप फायर और बार बी क्यू आग्नेय कोण में करना चाहिए। यदि पूर्व में स्वीमिंग पूल हो, तो इसे दक्षिण आग्नेय में करना चाहिए पर पूर्व आग्नेय में कभी नहीं।
  • फार्म हाउस में रहने के कमरे दक्षिण पश्चिम या नैऋत्य कोण में बनाने चाहिए और कमरों में पूर्व व उत्तर की ओर ज्यादा खिड़कियां रखनी चाहिए। कमरों में पलंग इस प्रकार लगाने चाहिए कि, सोने वालों के सिर दक्षिण में, पैर उत्तर की ओर हों।
  • अच्छे स्वास्थ्य के लिए फार्म हाउस में पूजा का स्थान ईशान कोण में रखना चाहिए, ताकि सूर्य से मिलने वाली सुबह की जीवनदाई किरणों का भरपूर लाभ लिया जा सके।
  • फार्म हाउस में दक्षिण-पश्चिम कोने को खुला छोड़कर उत्तर-पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम में टायलेट बनाना चाहिए। ध्यान रहे टायलेट का निर्माण ईशान कोण में किसी भी स्थिति में न करें।
  • सैप्टिक टैंक केवल पूर्व या उत्तर दिशा में ही बनाना चाहिए। यदि इन दोनों दिशाओं में किसी एक दिशा में स्वीमिंग पूल हो, तो दूसरी दिशा में बनाना चाहिए।
  • फार्म हाउस में हैल्थ क्लब, मसाज कक्ष, स्टीम बाथ इत्यादि का निर्माण वायव्य कोण में करना चाहिए। इन डोर गेम्स की व्यवस्था भी इसी स्थान के आसपास कर सकते हैं।
  • ओवर हैड वाटर टैंक का निर्माण पश्चिम वायव्य से लेकर दक्षिण नैऋत्य भाग के मध्य कहीं पर भी कर सकते हैं।
  • चिंतन व ध्यान योग केंद्र ईशान या पूर्व में रखना चाहिए। लाइब्रेरी पश्चिम दिशा में स्थापित कर सकते हैं।
  • टेनिस बैडमिंटन इत्यादि खेल के मैदान पूर्व या उत्तर में बनाने चाहिए।
  • ग्राहकों के मनोरंजन के लिए कामन हाल या कांफ्रेंस रूम वायव्य दिशा में बनाना चाहिए।
  • स्कूटर, कार पार्किंग इत्यादि की व्यवस्था दक्षिण या पश्चिम दिशा में कर सकते हैं।
  • फार्म हाउस में चारों ओर उद्यान बनाकर सब्जियां उगाई जा सकती हैं पर ध्यान रहे, छोटे वृक्ष उत्तर व पूर्व दिशा में और विशाल वृक्ष दक्षिण-पश्चिम दिशा में ही लगाने चाहिए।
  • फार्म हाउस के बगीचे में सहारा लेकर ऊपर चढ़ने वाली बेल मुख्य द्वार व भवन के आस-पास न लगाएं। इस प्रकार चढ़ने वाली बेलें कठिनाइयां पैदा करती हैं।
  • दूध वाले वृक्षों को फार्म हाउस में उगाना काफी अशुभ होता है, क्योंकि अधिकतर पेड़ों से निकलने वाला दूध जहरीला होता है। ऐसे पेड़-पौधों का दूध आंखों में चला जाए तो आंखें खराब हो जाती हैं, और कई बार आंखों की रोशनी तक चली जाती है।
  • ध्यान रहे, फार्म हाउस के बेड रूम के अंदर कभी भी पौधे नहीं रखने चाहिए, क्योंकि यह पौधे रात को कार्बन डाईआक्साइड छोड़ते हैं, इस कारण ऐसे बेड रूम में सोने वालों का स्वास्थ्य खराब होता है।

~ वास्तु गुरू कुलदीप सलूजा [thenebula2001@yahoo.co.in]

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