सपनों और नींद से जुड़ी कविताओं का संग्रह: कई बार ऐसा होता है कि नींद में सपने आने कि वजह से हमारी नींद भी पूरी नहीं हो पाती और तो और उन सपनों का अर्थ पता ना चल पाने कि वजह से विचार भी परेशान हो जाते हैं। तो आइये जानते हैं उनसे सपनों के पीछे के राज़
सपनों और नींद से जुड़ी कविताओं की सूची:
- एक अजूबा : सूर्यकुमार पांडेय
- नींद के सपने : विशाल कुमार
सपनों और नींद से जुड़ी कविताओं का संग्रह
‘एक अजूबा’: सूर्यकुमार पांडेय – सपनों और नींद से जुड़ी कविता [01]
मैंने एक
अजूबा कल, देखा
अपने सपने में,
सौ चूहे खा
मस्त-मगन,
बिल्ली माला जपने में।
चींटी के पर उग आए थे,
मिली हवा में उड़ती,
मछली देखी मैंने, जो पेड़ों
के ऊपर चढ़ती।
हुआ जुकाम
मेंढकी को था, मेंढक
गप्प लड़ाता,
चींपो-चींपो गधा सभी
को, अपने गीत सुनाता।
ऊंट न जाने किस करवट
बैठे, हम जान न पाए,
नींद खुल गई, हम यह
सब सपना है, मान न पाए।
~ सूर्यकुमार पांडेय
नींद के सपने: विशाल कुमार – सपनों और नींद से जुड़ी कविता [02]
मुझे नींद के सपने आते हैं,
गहरे अवचेतन में उतरने के सपने,
सोच के भँवर से निकलने के सपने,
सपने,
गहरी नींद के सपने।
फेरता हूँ करवटें,
कभी आँखें खोलकर,
कभी आँखें बंद कर,
कभी आँखें मींचकर,
करता हूँ प्रयास
उतरने का
अँधेरे, शांत अंतर्मन में,
गहरे तल में, जहाँ स्थिरता हो,
नींद की प्यारी झपकियों की कोमलता हो।
नींद स्वतः आती है,
बिन बुलाए आती है।
नींद का आना कोई चमत्कार नहीं,
नींद तो अनायास आती है,
नींद बिन प्रयास आती है।
फिर मुझे क्यों नहीं आती नींद?
क्या नींद का न आना रोग है?
रोग तो दिखते हैं –
कैंसर, मधुमेह, गठिया,
इनके बिगाड़ और सुधार दोनों ज्ञात हैं,
नींद का न आना
अभी भी अज्ञात है।
उससे ज़्यादा अज्ञात है
इसे बयाँ करने की भाषा।
कैसे बताऊँ,
डरता हूँ उस सुबह से,
जिस सुबह की रात ही नहीं,
क्योंकि छूट जाता है
सुबह और रात के अंतराल में बहुत कुछ।
कैसे कहूँ,
डरता हूँ उन रातों से
जिन रातों में सपने नहीं होते।
मुझे सपनों के सपने आते हैं,
मुझे नींद के सपने आते हैं।
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