जीवन पर कुछ प्रेरणादायक बाल-कविताएँ
सच बात तो यही है कि कभी-कभी ज़िंदगी उलझन भरी और मुश्किल हो जाती है। ऐसे समय में कविता का सहारा लेना फ़ायदेमंद साबित होता है। कविता में हमें यह एहसास दिलाने की शक्ति होती है कि हमें समझा जा रहा है — यह हमें सशक्त और आशावान बनाती है और याद दिलाती है कि ज़िंदगी जीने का क्या मतलब है।
- जिंदगी – भारती संगोत्रा
- बुढ़ापा – राम प्रसाद शर्मा ‘प्रसाद’
- आभा जीवन की – राजेंद्र निशेश
- नियम – राम प्रसाद शर्मा ‘प्रसाद’
- उसका जीना ही जीना है – ललित जैन
- समय – राम प्रसाद शर्मा ‘प्रसाद’
जिंदगी: बच्चों की कविता [1]
नींद बेच दी मैंने सपनों के आगे,
सपने बेच दिए मैंने मेहनत के आगे,
मेहनत बेच दी मैंने जीत के आगे।
नेत्र यूं ही नहीं रात-रात भर जागे,
अब लगता है जीत भी हमारे पीछे-पीछे भागे,
अब मेहनत का फल भी है, मिलने वाला लागे।
अपनों ने कहां ठोकरों ने पाला, जिंदगी ने सिखाया,
जो सिखा न सकी स्कूल की पाठशाला।
रातों को किया है हमने दिन का उजाला,
अब भरने ही वाला है, बूंदों से खाली प्याला।
कहीं कीचड़ में कमल, कहीं कांटों में गुलाब,
जिंदगी में हैं दुख बेहिसाब,
फिर भी जिंदगी है जीते हम जैसे हैं नवाब।
~ भारती संगोत्रा, जालंधर
बुढ़ापा: बच्चों की कविता [2]
टूटा-फूटा और पुराना,
क्लेश सहता यह तो नाना।
जीर्ण दुर्बल तन का धारी,
ऊपर से है सौ बीमारी।
उम्र बढ़ने पर यह आ जाए,
तन-मन में बदलाव लाए।
अनुभवों की लेकर थाती,
रखता यह तो मेरे साथी।
अरे, घन तम से ढका है यह,
पीड़ा सह कर सच में थका है यह।
कई इसने मौसम देखे,
रे, कौन करे इनके लेखे?
कई भावों की बहती गंगा,
कई रागों में यह है रंगा।
रही इसकी एक अभिलाषा,
ज्ञानी बने आज बुढ़ापा,
जीवन की यह पतझड़-वेला,
बुढ़ापा रहे न कभी अकेला।
हर शब्द के अर्थ को जाने,
भूले न कभी गीत पुराने।
~ राम प्रसाद शर्मा ‘प्रसाद’

आभा जीवन की: Life & Time Related Hindi Poetry [3]
नदिया की धारा से सीखा,
हमको आगे बढ़ना है।
हरियाली हर आंगन महके,
ऐसा कुछ है हमको करना।
मिटे नहीं आभा जीवन की,
हितकारी सांसों को भरना।
निज त्रुटियों को दूर भगाकर,
शूलों पर भी चलना है।
तर्कों की भाषा पहचानें,
वैज्ञानिक हमको बनना है।
हाथ नहीं फैलाना उत्तम,
बल अपना विकसित करना है।
व्यवधानों का झंझावत हो,
मजबूती से लड़ना है।
प्रेम-प्रीति जीवन परिभाषा,
ईर्ष्या-वैर न हमको भाता।
चाहे कैसी विकट डगर हो,
मुस्कानों से रखते नाता।
प्रेम-सुमन है हमें खिलाने,
हिम-शिखरों पर चढ़ना है।
~ राजेंद्र निशेश
नियम: प्रेरणादायक बच्चों की कविता [4]
रे! नियमबद्ध जीवन जीना,
मानो ‘अमृत घूंट’ पीना।
नियम नया हो या पुराना,
रे, बलि-बलि तुम इस पर जाना।
जो कड़वा सच करे उजागर,
ऐसी ही नियमों की गागर।
छद्म पाखंड की एक उधेड़,
कस न सके खेत की मेड़।
रे, नियमों की एक पिटारी,
पड़े कभी न तुझ पर भारी।
नियम-पालन करने वाले,
बन जाते सबके रखवाले।
नियमों पर तुम अडिग रहना,
समझना इन्हें तुम एक गहना।
सभी धर्मों के नियम सुंदर,
बन जाएं तुम्हारी धरोहर।
जीवन में जो नियम उतारे,
पूर्ण हों सब काज न्यारे।
महत्व नियमों का तुम जानो,
नियमों की तुम सार पहचानो।
नियम दुर्लभ नियम अनमोल,
समाय इनमें सांचे बोल।
कहे ‘प्रसाद’ नियम न तोड़ो,
दामन इनका कभी न छोड़ो।
~ राम प्रसाद शर्मा ‘प्रसाद’
उसका जीना ही जीना है [कविता 5]
जो मन को शांत और सम रखता, उसका जीना ही जीना है।
जो कभी तनाव नहीं रखता, उसका जीना ही जीना है।
जो रोज सवेरे योग करता, उसका जीना ही जीना है।
मिलते हैं लाभ-अलाभ कभी, मिलते हैं हर्ष-विषाद कभी।
समता से निज पथ पर बढ़ता, उसका जीना ही जीना है।।
मन में बढ़ता उल्लास कभी, पग-पग तम का आभास कभी।
विश्वास स्वयं पर जो रखता, उसका जीना ही जीना है।
निज का बदलाव नहीं जब तक, होता समाधान नहीं तब तक।
अपना सुधार प्रथम करता, उसका जीना ही जीना है।।
हम सभी स्वयं को पहचानें, आनन्द रूप हैं हम जानें।
जो मुक्त बंधनों से होता, उसका जीना ही जीना है।
जो सहता है, वह रहता है, अनुभव का सच यह कहता है।
जो योग से उसको सिद्ध करे, उसका जीना ही जीना है।।
साधना ही शांति का आधार है, योग विरहित जिंदगी बेकार है।
क्यों सताए क्रोध का आवेश अब, सहज समता योग का उपहार है।।
~ ललित जैन

समय [कविता 6]
चलती घड़ी को तुम झांको,
समय की तुम कीमत आंको।
समय निरंतर चलता रहता,
रुकने का यह नाम न लेता।
चलो तुम भी समय के साथ,
मिलाओ इससे तुम भी हाथ।
कहीं समय चूक नहीं जाए,
समय न हमें कभी भुलाए।
समय की तुम कद्र कर जाना,
व्यर्थ न तुम इसे गंवाना।
सदुपयोग जो इसका करता,
सफलता के डग वह है भरता।
लोग कहते समय बलवान,
कर जाओ तुम इसकी पहचान।
सैकेंड इसकी एक इकाई,
ऐसा समझो मेरे भाई।
जो इसे सफल सार्थक बनाता,
अच्छा मानव वह कहलाता।
कहे प्रसाद इसे अनमोल,
रे, झूठे नहीं ये तो बोल।
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