बच्चों की कविताएँ: बच्चों के लिए हँसने और सीखने के लिए 10 कविताएँ

बच्चों की कविताएँ: बच्चों के लिए हँसने और सीखने के लिए 10 कविताएँ

बच्चों की कविताओं की सूची

हिंदी के कई कवियों ने बच्चों के वर्तमान को संसार के भविष्य के लिए समझने की कोशिश की है। प्रस्तुत चयन में ऐसे ही कवियों की कविताएँ संकलित हैं। इन कविताओं में बाल-मन और स्वप्न उपस्थित है।

  1. खिलौना – रामप्रसाद शर्मा ‘प्रसाद’
  2. सफलता – रामप्रसाद शर्मा ‘प्रसाद’
  3. अच्छी बातें – रामप्रसाद शर्मा ‘प्रसाद’

बच्चों की कविता [1]: खिलौना

काठ, मोम व मिट्टी वाला,
कपड़े का भी बने निराला।
यह बच्चों के मन भाए,
दिल उनका भी यह बहलाए।

मनोरंजन यह करे प्रदान,
खिलौना बने स्वयं प्रधान।
गुड़िया हो या मॉडल कार,
छुनछुना भी करे झंकार।

भांत-भांत का देख खिलौना,
भर ले बच्चा घर का कोना।
कौशल इससे बच्चा दिखाए,
देख इसे पुलकित हो जाए।

कई इसके रंग और रूप,
खिलौना सबको बड़ा अनूप।
रे! हवाई जहाज और रेल,
बच्चों की यह बन जाए खेल।

देते कई इसका उपहार,
खुशी का रहे न पारावार।
‘प्रसाद’ रखे हाथ खिलौना,
बन जाए नित बच्चा बौना।

~ रामप्रसाद शर्मा ‘प्रसाद’

बच्चों की कविता [2]: सफलता

श्रम है सफलता का राज,
सुधरते इससे कई काज।
सफलता जो तुम पाना चाहो,
आगे-आगे कदम बढ़ाओ।

जीवन में है सरसता आती,
रे, बने जब सफलता साथी।
सफलता बनती एक इतिहास,
होता इससे जीवन विकास।

सफलता कुंजी जिसके पास,
होता नहीं वह कभी हताश।
विकास-पहिया जब-जब घूमे,
सफलता उसके पांव चूमे।

सफलता है गौरव-प्रतीक,
रे, बात यह तुम समझो ठीक।
सफल व्यक्ति आदर पाता,
बड़प्पन उसका है बढ़ जाता।

श्रम पसीना जो बहाता,
अधिकारी इसका वह तुरंत ही बन जाता।
कहे ‘प्रसाद’ सफलता पाओ,
जग में अपनी साख बढ़ाओ।

~ रामप्रसाद शर्मा ‘प्रसाद’

बच्चों की कविताएँ: बच्चों के लिए हँसने और सीखने के लिए 10 कविताएँ
बच्चों की कविताएँ: बच्चों के लिए हँसने और सीखने के लिए 10 कविताएँ

बच्चों की कविता [3]: अच्छी बातें

अच्छी बातें भोली बातें,
रे, नहीं किसी को हम डांटें।

वाणी में हम भरें मिठास,
छोड़ें नहीं हम जीवन आस।

रे! सांसों का सरगम बोले,
मीठी-मीठी मिसरी घोले।

सरसता और उल्लास रहे,
पावनता का भी वास रहे।

सपनों को साकार बनाएं,
रे नया एक संसार बसाएं।

नई कविता का भावसृजन,
कर जाए रे, पुलकित मन।

दुख आए तो कभी न चीखो,
बड़े काम की बातें सीखो।

सतत् लेखन का शौक जागे,
शब्दों के बुन जाएं धागे।

सब में पनपे प्रेम का बीज,
कभी न आए मन में खीज।

सभी के साथ घुल-मिल जाए,
कहे प्रसाद मौज मनाएं।

~ रामप्रसाद शर्मा ‘प्रसाद’

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