किताबों और पढ़ने के महत्व पर हिंदी कविताएँ: Short Hindi Poems on Books & Book Reading

किताबों और पढ़ने के महत्व पर हिंदी कविताएँ: Short Hindi Poems on Books & Book Reading

पुस्तक: किताबों और पढ़ने के महत्व पर हिंदी कविता [1]

पुस्तकें हमारे लिए नए अनुभव और ज्ञान-संसार के द्वार खोलती हैं। किताबों और पढ़ने के आनंद और महत्व के बारे में प्रेरणादायक कविताएँ

देती पुस्तक मित्रवत् साथ,
पकड़ो इसे तुम अपने हाथ।
जिंदगी के स्वर संवारे,
ज्ञान-चेतना नहीं नकारे।

ऊर्जा की संवाहक पुस्तक,
बने सबकी चाहत पुस्तक।
रे! हर्फ इसके तुम पढ़ जाना,
लुत्फ नया तुम एक उठाना।

अरे! पुस्तक-सा न कोई धन,
ऊबे न कभी इससे मन।
भांत-भांत के रंग यह छिटके,
बेखबर रहे न कोई इससे।

अंधेरे में यह करे उजाला,
पड़े प्रतिदिन इससे पाला।
दान-पुण्य देने वाली,
पुस्तक समझो बड़ी निराली।

इसमें है संस्कृति का पाठ,
रे! इसका एक निराला ठाठ।
कहे ‘प्रसाद’ प्रसून खिलाए,
जीवन-मंत्र पुस्तक सिखाए।

~ रामप्रसाद शर्मा ‘प्रसाद’

विद्वान बनो: हिंदी कविता [2]

तुम पढ़-लिख कर विद्वान बनो,
रे! विद्या के धनवान बनो।
सीखो तुम भी अक्षर-ज्ञान,
गाओ तुम प्रेम का गान।

जीवन में न रहे अंधियारा,
लाओ तुम भी एक उजियारा।
विद्या बने कंठ का भूषण,
रहे न अनपढ़ता-प्रदूषण।

पुस्तक-प्रेम बने न्यारा,
ऐसा बने नेम तुम्हारा।
विद्वान सर्वत्र पूजा जाता,
विद्या का यह खोले खाता।

विद्वान कभी मात न खाए,
कर्त्तव्य अपना खूब निभाए।
शान देश की है विद्वान,
आन देश की है विद्वान।

उजाला जग में विद्वान करे,
तमस जग की विद्वान हरे।
‘प्रसाद’ करे विद्वान आदर,
शीश झुकाए वह तो सादर।

~ रामप्रसाद शर्मा ‘प्रसाद’

विद्वान बनूंगी: हिंदी कविता [3]

पढ़-लिख कर विद्वान बनूंगी,
भारत देश की शान बनूंगी।
अनपढ़ता का शाप बुरा है,
निरक्षरता का संताप बुरा है।

मन लगा कर पढ़ाई करूंगी,
मेहनत से न कभी डरूंगी।
बचपन में जो पढ़ जाता,
अपना भाग्य वह चमकाता।

कापी-पैंसिल लेकर हाथ,
पढूंगी मैं सबके साथ।
समय नहीं बर्बाद करूंगी,
अपना पाठ मैं याद करूंगी।

जीवन बनेगा सुखदाई,
होगी सबकी खूब भलाई।
कथा कहानी गीत सुनूंगी,
सपने सुनहरे मैं बुनूंगी।

घर-आंगन में धूम मचेगी,
सहोदरा भी खूब हंसेगी।
फटती पौ किरण सुनहरी,
‘प्रसाद’ देखे विद्वान परी।

~ रामप्रसाद शर्मा ‘प्रसाद’

स्वाध्याय: किताबों और पढ़ने के महत्व पर हिंदी कविता
स्वाध्याय: किताबों और पढ़ने के महत्व पर हिंदी कविता

स्वाध्याय: किताबों और पढ़ने के महत्व पर हिंदी कविता [4]

जीवन लक्ष्य को बांधो भाई,
स्वाध्याय समझो सुखदाई।

परिष्कृत-सुसंस्कृत मन,
रे, रहे सदैव ही यह प्रसन्न।

दुख संकट से न हो चित व्यथित,
स्वाध्याय से हो कर्म उचित।

विश्वास-भक्ति स्वाध्याय रमे,
अखंड अविराम ज्योति जगे।

स्वाध्याय की उमंग डोले,
रे, अंदर के कपाट खोले।

नियमों-संयमों का अभ्यास,
स्वाध्याय की बने आस,

अमृत समझो स्वाध्याय,
ऐसे गीत पुराण भी गाए।

चिंतन मनन इससे होता,
रे! कुबुद्धि को यह है धोता।

प्रक्रिया है इसकी सुंदर,
मानो तुम मेरे प्रियवर।

इधर-उधर नहीं भटके मन,
प्रसाद करे संस्कृति चिंतन।

~ रामप्रसाद शर्मा ‘प्रसाद’

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