पशु पक्षियों से जुड़ी कवितायेँ: Short Hindi Poems on Animals & Birds

पशु पक्षियों से जुड़ी कविताएँ: Short Hindi Poems on Animals & Birds

तितली: बच्चों के लिए तितली पर हिंदी कविता पढ़ें – [1]

तितली हमें जीवन में बदलाव की ज़रूरत, संघर्ष के बाद खूबसूरती, हर पल को पूरी तरह जीने, आजादी, उम्मीद और नई शुरुआत का महत्व सिखाती है; यह बताती है कि कठिन समय से गुजरने के बाद ही सच्चा परिवर्तन आता है और हमें जीवन के छोटे-छोटे पलों का आनंद लेना चाहिए, ठीक वैसे ही जैसे तितली कोकून के संघर्ष से निकलकर आज़ादी से उड़ती है।

तितली नाचे रंग-बिरंगी,
बन जाए फूलों की संगी।

पकड़ं तो यह हाथ न आवे,
चंचलै बनकर तितली धावे।

रे फूलों का रस पी जाना,
ढब इसका है बड़ा पुराना।

चार होते पंख रंगीन,
अपने को नहीं समझे दीन।

बन-ठन कर यह रहने वाली,
नाचे फूलों पर मतवाली।

परिवर्तन का प्रतीक है यह,
सुंदरता की लीक है यह।

काया पलट में माहिर है यह,
मुक्ति में जगजाहिर है यह।

शुभ संकेत यह लेकर आती,
सुख-समृद्धि लेकर आती।

परागण भूमिका में प्रवीण,
‘प्रसाद’ न समझे इसे दीन।

~ राम प्रसाद शर्मा ‘प्रसाद’

तितली: पशु पक्षियों से जुड़ी कविताएँ [2]

मनोहर और रंग बिरंगी,
फूल बने हैं इसके संगी।

आत्मबल और विश्वास,
मिल जाएंगे तितली पास।

बच्चों के मन तितली भाती,
ठुमक-ठुमक कर,
खूब नाच दिखाती।

मौन धारे या शोर मचाए,
पंख फैलाकर उड़ती जाए।

रे, रंगों की है रानी यह,
कितनी बड़ी स्यानी यह।

पकड़ में नहीं आती तितली,
सबके मन को भाती तितली।

नटखट बालक पकड़ें इसको,
धागों से भी जकड़ें इसको।

खिलते फूल जहां दिख जाएं,
तितली को वे खूब रिझाएं।

सजी-संवरी फूल-क्यारी,
तितली को भी लगे प्यारी।

सबका मन हर्षाए तितली,
प्रसाद का मन भाए तितली।

~ राम प्रसाद शर्मा ‘प्रसाद’

नन्ही गौरैया
नन्ही गौरैया

नन्ही गौरैया: पशु पक्षियों से जुड़ी कविताएँ [3]

हमारे घर में बहुत गौरैया आती हैं,
चीं-चीं करके मीठा गाना गाती हैं।
फुदक-फुदक कर आंगन भर में,
तिनके लेकर आती हैं,
छोटा-सा एक घर बनाने की,
कोशिश कर दिखलाती हैं।
कभी ताक पर, कभी
पंखे पर,
अपना महल सजाती हैं … ।

अपनी नन्ही आंखों को वे
इधर-उधर घुमाती हैं।
दाना-दुनका गिरा मिले तो,
झट से आकर उठाती हैं।
खा कर वो गिरा अन्न
का दाना-
अपनी भूख मिटाती हैं … ।

कटोरी भर के पानी रख दूं-
झट से पीने आ जाती हैं,
पंखों को झटका लगाकर,
पानी में घुस जाती हैं।
कटोरी के पानी से ही-
नहा कर खुश हो जाती हैं … ।

बिल्ली को देखे तो डर कर-
दीवार के ऊपर बैठती हैं,
आंख घुमा कर इधर-उधर,
बिल्ली को ही देखती हैं,
चिड़-चिड़करके अपनी साथी
सखियों को बुलाती हैं … ।

मिल-जुल कर ही खाती रहतीं
अम्बर में उड़ जाती हैं,
नन्ही-सी ये जान है लेकिन-
जीवन का पाठ पढ़ाती है,
खुश रहना और चहकते रहना
सबको यही सिखाती है।

~ ओमकार सूद बहोना (फरीदाबाद)

कोयल: पशु पक्षियों से जुड़ी कविताएँ [4]

कोयल रानी बड़ी सियानी,
अद्भुत तेरी अमर कहानी।
शहद-सरीखे तेरे बोल,
मन में आता ले लूं मोल।

पंचम स्वर तू गाती गीत,
मन सबका तू जाती जीत।
आम्रकुंज में तेरा वास,
परिवेश में तू भरे उल्लास।

बसन्त-सन्देश लेकर आती,
बोली तेरी सबको भाती।
‘कू-कू’ करती गीत सुनाए,
अरी! सबका तू मन हर्षाए।

छुप-छुप कर ही तुम गाती हो,
बता किससे तुम शर्माती हो?
री! कण्ठ तेरा बड़ा सुरीला,
अद्भुत रची प्रभु ने लीला।

मीठे बोल मुझे सिखा दो,
आलस सारा दूर भगा दो।
नीड़ बनाना तू न जाने,
परजीवी का नाम बखाने।

री फिरती तू डाली-डाली,
गाती होकर तू मतवाली।
‘प्रसाद’ ढूंढे व हर्षाए,
तेरे संग वह प्रीत बढ़ाए।

~ रामप्रसाद शर्मा ‘प्रसाद’

नन्ही चिड़िया: पशु पक्षियों से जुड़ी कविताएँ
नन्ही चिड़िया

नन्ही चिड़िया: पशु पक्षियों से जुड़ी कविताएँ [5]

तिनका-तिनका लाती चिड़िया,
घर अपना बनाती चिड़िया।

सुबह सवेरे आंगन में नित,
दाना चुगने आती चिड़िया।

देख दर्पण में सूरत अपनी,
चोंच खूब लड़ाती चिड़िया।

पंख फैलाकर उड़ती नभ में,
मेल सबसे बढ़ाती चिड़िया।

एक डाल पर बैठी रहती,
चिऊं चींचींचीं गाती चिड़िया।

कभी न बैठे घर में ठाली,
श्रम का पाठ पढ़ाती चिड़िया।

~ यश भारद्वाज

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