लाल परी: लाल गुलाब से आसमानी परी की बातचीत

लाल परी: लाल गुलाब से आसमानी परी की बातचीत

लाल परी: रात के लगभग 1 बजे होंगे। सुंदरवन में एक सुंदर सी लड़की दिखाई दी। “देखो सोनू एक नन्ही सी गुड़िया।” मोनू ने कहा।

“अरे इसके तो पंख भी हैं… पंखों वाली लड़की।” सोनू ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा।

सोनू और मोनू दोनों शरारती थे। वे सुंदरवन के बगीचे में रंग-बिरंगे फूलों को चुराने के लिए एक पेड़ पर छुपे बैठे थे।

लाल परी: गोविन्द भारद्वाज जी की एक और बाल-कहानी

“पंखों वाली लड़की को तो दादी मां परी कहकर मुझे कहानी सुनाती है… कहीं यह परी तो नहीं?” मोनू ने पूछा।

“हो सकता है… किंतु परियां तो आसमान में रहती हैं…।” सोनू ने जवाब दिया।

“परियां तो एक समूह में रहती हैं, पर यह अकेली दिखाई दे रही है।” मोनू ने थोड़ी तेज आवाज में कहा।

लाल कपड़ों वाली परी इधर-उधर घूम रही थी। रंग-बिरंगे फूलों को देखकर मुस्कुरा रही थी।” आज मैं आसमान के सितारों को छोड़कर जमीन के रंग-बिरंगे सितारों से मिलने आई हूं। सचमुच फूल सुंदर ही नहीं होते बल्कि खुशबूदार भी होते हैं।” परी ने मन ही मन कहा।

“तुम परी हो?” एक गुलाब के फूल ने पूछा।

“हां, मैं लाल परी हूं… बिल्कुल तुम्हारे जैसी… तुम भी तो लाल गुलाब हो… लेकिन एक बात बताओ कि तुमने कैसे जाना कि मैं लाल परी हूं?” लाल परी ने पूछा।

“दरअसल तुम्हारे पंखों को देखकर… हमें भौर और तितलियां परियों की कहानी सुनाते रहते हैं और लाल इसलिए कहा कि तुमने लाल परिधान पहन रखे हैं।” गुलाब ने जवाब दिया।

“तुम तो बड़े होशियार हो… एक और बात बताओ, तितली और भौरे कहां हैं?”

“वे सब तो सो रहे हैं, आधी रात से ज्यादा हो चुकी है।”

“और तुम क्यों जाग रहे हो आधी रात को लाल गुलाब जी?”

“मैं तुम्हारी आहट सुनकर जाग गया और मैं बड़ी कच्ची नींद में सोया हूँ। वैसे भी मैं यहां का राजा हूं। मुझे तो सतर्क रहना पड़ता है।” उसने झट से उत्तर दिया।

लाल गुलाब ने पूछा, “तुम धरती पर क्यों आईं हो?”

“अपने दल के साथ आसमान में पर फैलाए घूम रही थी लेकिन तुम्हारे रंग-रूप और खुशबू ने मुझे नीचे आने पर मजबूर कर दिया।” परी ने कहा।

सोनू और मोनू उन दोनों की बातें चुपचाप सुन रहे थे।

लाल गुलाब से लाल परी ने पूछा, “तुम हो गुलाब लेकिन तुम सबके रंग अलग क्यों हैं?”

“हम सब गुलाब हैं लेकिन हमारी किस्म अलग-अलग है – लाल, गुलाबी, नीला, पीला और सफेद।”

“फिर तो काला भी होता होगा?” लाल परी ने ठहाका लगाकर पूछा।

“हां बिल्कुल होता है।” लाल गुलाब ने जवाब दिया।

“सुना है तुम बड़े उपयोगी हो, मानव के लिए?” लाल परी ने पूछा।

“बहुत उपयोगी हैं हम, मंदिरों, मजारों, गुरुद्वारों, में चढ़ाने के साथ-साथ हमारी माला भी बनाई जाती है। लोग हमारी प्रदर्शनी लगाते हैं। शहीदों के शवों पर हमें चढ़ाया जाता है।” लाल गुलाब ने बताया।

“मैंने तो सुना था कि गुलाबों से इत्र और गुलकंद बनाया जाता है।” परी ने पूछा।

“हां बिल्कुल ठीक सुना है तुमने, हमारा जल भी बहुत उपयोगी होता है, जिसे दुनिया गुलाब जल कहती है।” लाल गुलाब ने जवाब दिया।

“इतना सुंदर होते हुए भी तुम कांटों के साथ रहते हो।”

“ये कांटे हमारे सुरक्षा कवच हैं। इनसे हमारी पहचान है।”

इस बार लाल परी ने कहा, “तुम भिन्न-भिन्न रंग के होकर भी कहलाते गुलाब हो… यह बढ़िया बात लगी।”

“बिल्कुल हम एक हैं… पता नहीं इस धरती के आदमी क्यों आपस में जाति-धर्म, नस्ल और रंग-रूप के आधार पर लड़ते रहते हैं… पूरी दुनिया युद्ध के लिए तैयार बैठी है।” लाल गुलाब ने चिंता जताते हुए कहा।

“तैयार बैठे हैं…? कुछ देश तो आज भी युद्ध में लिप्त हैं… हमारे आसमान में इनका धुआं और विस्फोट फैला हुआ है, बमों और तोपों की गर्जना से आसमान की शांति भी भंग हो चुकी है।” लाल परी ने कहा।

“मुझे लगता है अब चलना चाहिए, उजाला होने से पहले मुझे परी लोक में जाना होगा।” लाल परी ने विदा लेते हुए कहा।

“ठीक है तुम जाओ, वरना लोग तुम्हें पकड़ लेंगे। यहां तो तितलियों को भी पकड़ लेते हैं।” लाल गुलाब ने कहा।

सोनू और मोनू चुपचाप पेड़ से उतरे। दोनों को लगा कि हम इंसान होकर भी शरारत करते हैं और ये फूल होकर भी कितने बुद्धिमान हैं।

“सोनू आज से शरारत बंद और हम भी अपने घरों की खुली जगह में रंग-बिरंगे गुलाब लगाएंगे।” मोनू ने कहा।

“अब जल्दी चल, घर वाले जाग जाएंगे तो हमें ढूंढेंगे।” सोनू ने कहा।

~ गोविन्द भारद्वाज, अजमेर

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