Publisher: Rupa Pages: 283 Price: Rs.500 Branding is the biggest buzzword for any product to thrive, or even survive. But how does one create a successful brand? For Anisha Motwani, the idea for the book began with a simple question: How is it that in a diverse, challenging and often predictable market like India, a handful of companies are doing …
Read More »Yearly Archives: 2016
तेरी याद – बलविंदर ‘बालम’
दर्द की कीमत चुकाई जाएगी याद तेरी जब भी पाई जाएगी चैन फिर उड़ने लगेगा प्यार में नींद आंखों से चुराई जाएगी दूरियां उस को समझ आ जाएंगी जब मेरी अरथी उठाई जाएगी वो मुझ से मिलने का वादा तो करे पथ पर चांदनी बिछाई जाएगी उलटा दर्पण उस ने सीधा कर दिया अब हकीकत ही दिखाई जाएगी रूठने का …
Read More »प्यार की बात करो – शंभु शरण मंडल
जब कभी इश्क प्यार की बात करो न कभी जीत हार की बात करो दो घड़ी ये मिलन की हमारे लिए कीमती हैं दीदार की बात करो डर गए तो गए इस जमाने से हम अब चलो आर पार की बात करो संग मिल के सनम खाई थी जो कसम वक्त है इकरार का बात करो ~ शंभु शरण मंडल
Read More »नाश देवता – गजानन माधव मुक्तिबोध
घोर धनुर्धर‚ बाण तुम्हारा सब प्राणों को पार करेगा‚ तेरी प्रत्यंचा का कंपन सूनेपन का भार हरेगा। हिमवत‚ जड़‚ निःस्पंद हृदय के अंधकार में जीवन भय है। तेरे तीक्षण बाण की नोकों पर जीवन संचार करेगा। तेरे क्रुद्ध वचन‚ बाणों की गति से अंतर में उतरेंगे‚ तेरे क्षुब्ध हृदय के शोले‚ उर ही पीड़ा में ठहरेंगे। कोपित तेरा अधर संस्फुरण‚ …
Read More »माता की मृत्यु पर – प्रभाकर माचवे
माता! एक कलख है मन में‚ अंत समय में देख न पाया आत्मकीर के उड़ जाने पर बची शून्य पिंजर सी काया। और देख कर भी क्या करता? सब विज्ञान जहां पर हारे‚ उस देहली को पार कर गयी‚ ठिठके हैं हम ‘मरण–दुआरे’। जीवन में कितने दुख झेले‚ तुमने कैसे जनम बिताया! नहीं एक सिसकी भी निकली‚ रस दे कर …
Read More »लो वही हुआ – दिनेश सिंह
लो वही हुआ जिसका था डर‚ ना रही नदी‚ ना रही लहर। सूरज की किरण दहाड़ गई गरमी हर देह उधाड़ गई‚ उठ गया बवंडर‚ धूल हवा में अपना झंडाा गाड़ गई गौरैया हांफ रही डर कर‚ ना रही नदी‚ ना रही लहर। हर ओर उमस के चर्चे हैं‚ बिजली पंखों के खरचे हैं‚ बूढ़े महुए के हाथों से उड़ …
Read More »Vocalist Jai Thirath Mevandi – Indian classical ragas can work as alternate medicine
Hindustani classical vocalist Jai Thirath Mevandi belongs to the land that has given gems like Pt Sawai Gandharva and Pt Bhimsen Joshi. Following his mother who hummed devotional songs while doing household chores, Jai Thirath took a liking to music right from his childhood. He started learning classical music under Pt Arjunsa Nakod at the age of 14. Inspired by …
Read More »टुकड़ा टुकड़ा जिंदगी – वंदना गोयल
इस टुकड़ा टुकड़ा जिंदगी को हंस के मैं पी रही हूं किस्तों में मिल रही है किस्तों में जी रही हूं कभी आंखों में छिपा रह गया था इक टुकड़ा बादल बरसते उन अश्कों को दिनरात मैं पी रही हूं अक्स टूटते बिखरते आईनों से बाहर निकल आते हैं मेरा समय ही अच्छा नहीं बस जज्बातों में जी रही हूं …
Read More »कल और आज – नागार्जुन
अभी कल तक गालियां देते थे तुम्हें हताश खेतिहर, अभी कल तक धूल में नहाते थे गौरैयों के झुंड, अभी कल तक पथराई हुई थी धनहर खेतों की माटी, अभी कल तक दुबके पड़े थे मेंढक, उदास बदतंग था आसमान! और आज ऊपर ही ऊपर तन गए हैं तुम्हारे तंबू, और आज छमका रही है पावस रानी बूंदा बूंदियों की …
Read More »Hindi Jokes
गाय और बछड़ा सिपाही – यह गाय और बछड़ा किसका हैं? राम – गाय का तो मुझे पता नहीं, पर बछड़ा किसका हैं यह मैं जनता हूँ। सिपाही – किसका हैं? राम – जी गाय का। भिखारी भिखारी (सेठ से) – भगवान ने नाम पर कुछ दे दे सेठ जी। सेठ – अभी खुल्ले नहीं हैं कल ले लेना। भिखारी …
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