Yearly Archives: 2016

झर गये पात – बालकवि बैरागी

झर गये पात - बालकवि बैरागी

झर गये पात बिसर गई टहनी करुण कथा जग से क्या कहनी? नव कोंपल के आते–आते टूट गये सब के सब नाते राम करे इस नव पल्लव को पड़े नहीं यह पीड़ा सहनी झर गये पात बिसर गई टहनी करुण कथा जग से क्या कहनी? कहीं रंग है‚ कहीं राग है कहीं चंग है‚ कहीं फाग है और धूसरित पात …

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निःस्वार्थ सेवा की सच्ची कहानी

निःस्वार्थ सेवा की सच्ची कहानी

यह अभियान एक निःस्वार्थ सेवा थी जिसके हीरो स्मृता के पिता राजिंदर सिंह आहलूवालिया थे। कुवैत से अचानक अपना सब कुछ छोड़ कर मुम्बई के सहारा हवाई अड्डे (अब छत्रपति शिवजी अंतरार्ष्ट्रीय हवाई अड्डा) पहुंच रहे भारतीयों के लिए वह कुछ करना चाहते थे। इस सेवा में पूरे परिवार ने साथ दिया। स्मृता उस घटनाक्रम को याद करते हुए बताती …

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ताला-चाबी – ओमप्रकाश बजाज

ताला-चाबी - ओमप्रकाश बजाज

छोटे से छोटे से लेकर, खूब बड़े ताले आते है। मकान, दुकान, दफ्तर, फैक्टरी, बक्स गाडी में लगाए जाते है। ताला सुरक्षा का एक साधन है, सदियों से इसका प्रचलन है। अलीगढ़ के ताले प्रसिद्ध है, अब तो कई जगह बनते हैं। ताला अपनी चाबी से खुलता है, नंबरों वाला ताला भी आता है। चाबी सदा संभाल कर रखना, इधर-उधर …

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कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता – निदा फ़ाज़ली

कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता - निदा फ़ाज़ली

कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता कहीं ज़मीं तो कहीं आसमाँ नहीं मिलता बुझा सका है भला कौन वक़्त के शोले ये ऐसी आग है जिसमें धुआँ नहीं मिलता तमाम शहर में ऐसा नहीं ख़ुलूस न हो जहाँ उमीद हो सकी वहाँ नहीं मिलता कहाँ चिराग़ जलायें कहाँ गुलाब रखें छतें तो मिलती हैं लेकिन मकाँ नहीं मिलता ये …

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पिता सरीखे गांव – राजेंद्र गौतम

पिता सरीखे गांव – राजेंद्र गौतम

तुम भी कितने बदल गये हो पिता सरीखे गांव! परंपराओं का बरगद सा कटा हुआ यह तन बो देता है रोम रोम में बेचैनी सिहरन तभी तुम्हारी ओर उठे ये ठिठके रहते पांव। जिसकी वत्सलता में डूबे कभी सभी संत्रास पच्छिम वाले उस पोखर की सड़ती रहती लाश किसमें छोड़ें सपनों वाली काग़ज की यह नाव! इस नक्शे से मिटा …

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Chinese Lantern Plant

Chinese Lantern Plant

Chinese Lantern Plant — Physalis alkekengi (Bladder-cherry, Chinese Lantern, Japanese-lantern, or Winter cherry; Japanese: hōzuki), is a relative of P. peruviana (Cape Gooseberry), easily identifiable by the larger, bright orange to red papery covering over its fruit, which resemble Chinese lanterns. It is native from southern Europe east across southern Asia to Japan. It is a herbaceous perennial plant growing …

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Aakash Hingu’s ExJunk, Free App to sell household junk

Aakash Hingu’s ExJunk, Free App to sell household junk

Taking a cue from the Swachh Bharat movement initiated by Prime Minister Narendra Modi, a young IIT Mandi alumnus, Aakash Hingu, has come out with an innovative way to dispose scrap. He also reasons out why Chandigarh has lost in the race for Smart City. The idea is to “make recycling of scrap a habit,” says this 24-year-old, whose brainchild …

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