एक पेड़ पर नदी किनारे, बन्दर मामा रहते थे। वर्षा गर्मी सर्दी उसी पेड़ पर रहते थे। भूख मिटाने को बगिया से चुन चुन फल खाया करते। य़ा छीन झपट बच्चों से ये चीजें ले आया करते। खा पी सेठ हुए मामा जी, झूम झूम इठलाते थे। और नदी के मगर मौसिया देख देख ललचाते थे। सोचा करते अगर कहीं …
Read More »Yearly Archives: 2015
बिल्ली मौसी, बिल्ली मौसी
बिल्ली मौसी, बिल्ली मौसी, कहो कहाँ से आई हो? कितने चूहे मारे तुमने, कितने खा का आई हो? क्या बताऊँ लोमड़ भाई, आज नहीं कुछ पेट भरा। एक ही चूहा पाया मैंने, वह भी बिलकुल सड़ा हुआ।
Read More »भारत माँ के लाल – तरुश्री माहेश्वरी
हम हैं भारत माँ के लाल यूँ तो हम कहलाते बाल, भारत की शान बढ़ाएंगे इस पर शीश झुकाएँगे। जो हम से टकराएगा मुफ्त में मारा जाएगा, कह दो इस जहाँ से पंगा न ले हिंदुस्तान से। कहने को हमें जोश नहीं ये मत समझो होश नहीं, यह देश जो हमें बुलाएगा हर बच्चा शीश कटाएगा। ∼ तरुश्री माहेश्वरी
Read More »बतूता का जूता – सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
इब्न बतूता, पहन के जूता निकल पड़े तूफान में। थोड़ी हवा नाक में घुस गई, थोड़ी घुस गई कान में। कभी नाक को, कभी कान को, मलते इब्न बतूता। इसी बीच में निकल पड़ा, उनके पैरों का जूता। उड़ते-उड़ते जूता उनका, जा पहुँचा जापान में। इब्न बतूता खड़े रह गए, मोची की दूकान में। ∼ सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
Read More »इक ओंकार सतनाम करता पुरख – हर्षदीप कौर
इक ओंकार सतनाम करता पुरख निर्मोह निर्वैर अकाल मूरत अजूनी सभम गुरु परसाद जप आड़ सच जुगाड़ सच है भी सच नानक होसे भी सच सोचे सोच न हो वे जो सोची लाख वार छुपे छुप न होवै जे लाइ हर लख्तार उखिया पुख न उतरी जे बनना पूरिया पार सहास्यांपा लाख वह है ता एक न चले नाल के …
Read More »पीतल के बर्तनो का इस्तेमाल करें – जीवन सुधर जायेगा
पीतल अर्थात ब्रास एक मिश्रित धातु है। पीतल का निर्माण तांबा व जस्ता धातुओं के मिश्रण से बनाया जाता है। पीतल शब्द “पीत” से बना है तथा संस्कृत में ‘पीत’ का अर्थ ‘पीला’ होता है तथा धार्मिक दृष्टि से पीला रंग भागवान विष्णु को संबोधित करता है। सनातन धर्म में पूजा-पाठ व धार्मिक कर्म हेतु पीतल के बर्तन का ही …
Read More »चित्र – नरेश अग्रवाल
चित्र से उठते हैं तरह-तरह के रंग लाल-पीले-नीले-हरे आकर खो जाते हैं हमारी आंखों में फिर भी चित्रों से खत्म नहीं होता कभी भी कोई रंग। रंग अलग-अलग तरह के कभी अपने हल्के स्पर्श से तो कभी गाढ़े स्पर्श से चिपके रहते हैं, चित्र में स्थित प्रकृति और जनजीवन से। सभी चाहते हैं गाढ़े रंग अपने लिए लेकिन चित्रकार चाहता …
Read More »चित्रकार – नरेश अग्रवाल
]मैं तेज़ प्रकाश की आभा से लौटकर छाया में पड़े कंकड़ पर जाता हूँ वह भी अंधकार में जीवित है उसकी कठोरता साकार हुई है इस रचना में कोमल पत्ते मकई के जैसे इतने नाजुक कि वे गिर जाएँगे फिर भी उन्हें कोई संभाले हुए है कहाँ से धूप आती है और कहाँ होती है छाया उस चित्रकार को सब-कुछ …
Read More »चूड़ामणि शक्तिपीठ, रूड़की, उत्तराखंड
सच्चे और ईमानदार लोग भगवान को बहुत प्रिय होते हैं। उनके साथ वो कभी कुछ बुरा नहीं होने देते सदा उनके अंग-संग रहते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं पाप करने पर भी पुण्य प्राप्त किया जा सकता है। आज हम आपको यात्रा करा रहे हैं एक ऐसे मंदिर की जहां पाप करने के उपरांत ही मिलती हैं मनचाही मुरादें। …
Read More »गड़बड़ घोटाला – सफ़दर हाश्मी
यह कैसा है घोटाला, कि चाबी में है ताला। कमरे के अंदर घर है, और गाय में है गौशाला॥ दांतों के अंदर मुहं है, और सब्जी में है थाली। रुई के अंदर तकिया, और चाय के अंदर प्याली॥ टोपी के ऊपर सर है, और कार के ऊपर रस्ता। ऐनक पर लगी हैं आँखें, कापी किताब में बस्ता॥ सर के बल …
Read More »
Kids Portal For Parents India Kids Network