Islam — The Arabic word Islam literally means both “surrender” and “peace”. Surrender to the will of God and the peace that is entailed in that surrender. Islam is a monotheistic religion and believe that to search for God through images is a sin. Muslim teachings correspond closely with the Old Testament of Bible, and Moses and Jesus are both accepted …
Read More »Yearly Archives: 2015
हर घट से: चिंतन पर नीरज की प्रेरणादायक हिंदी कविता
This is a famous poem of Niraj. One has to be selective in life, put in sustained efforts and be patient in order to succeed. हर घट से: गोपाल दास नीरज हर घट से अपनी प्यास बुझा मत ओ प्यासे! प्याला बदले तो मधु ही विष बन जाता है! हैं बरन बरन के फूल धूल की बगिया में लेकिन सब ही …
Read More »Aesop’s Fables
The Gnat and the Bull A GNAT settled on the horn of a Bull, and sat there a long time. Just as he was about to fly off, he made a buzzing noise, and inquired of the Bull if he would like him to go. The Bull replied, “I did not know you had come, and I shall not miss …
Read More »कलाकार और सिपाही – सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
वे तो पागल थे जो सत्य, शिव, सुंदर की खोज में अपने–अपने सपने लिये नदियों, पहाड़ों, बियाबानों, सुनसानों मे फटे–हाल भूखे प्यासे, टकराते फिरते थे, अपने से जूझते थे, आत्मा की आज्ञा पर मानवता के लिये, शिलाएँ, चट्टानें, पर्वत काट–काट कर मूर्तियाँ, मन्दिर, और गुफाएँ बनाते थे। किंतु ऐ दोस्त! इनको मैं क्या कहूँ, जो मौत की खोज में अपनी–अपनी …
Read More »जब जब सिर उठाया – सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
जब-जब सिर उठाया अपनी चौखट से टकराया। मस्तक पर लगी चोट, मन में उठी कचोट, अपनी ही भूल पर मैं, बार-बार पछताया। जब-जब सिर उठाया अपनी चौखट से टकराया। दरवाजे घट गए या मैं ही बडा हो गया, दर्द के क्षणों में कुछ समझ नहीं पाया। जब-जब सिर उठाया अपनी चौखट से टकराया। “शीश झुका आओ” बोला बाहर का आसमान, …
Read More »Thought Of The Day Quotes in English
Thought Of The Day
Read More »साकेत: दशरथ का श्राद्ध, राम भारत संवाद – मैथिली शरण गुप्त
उस ओर पिता के भक्ति-भाव से भरके, अपने हाथों उपकरण इकट्ठे करके, प्रभु ने मुनियों के मध्य श्राद्ध-विधि साधी, ज्यों दण्ड चुकावे आप अवश अपराधी। पाकर पुत्रों में अटल प्रेम अघटित-सा, पितुरात्मा का परितोष हुआ प्रकटित-सा। हो गई होम की शिखा समुज्ज्वल दूनी, मन्दानिल में मिल खिलीं धूप की धूनी। अपना आमंत्रित अतिथि मानकर सबको, पहले परोस परितृप्ति-दान कर सबको, …
Read More »साकेत: अष्टम सर्ग – मैथिली शरण गुप्त
तरु–तले विराजे हुए, शिला के ऊपर, कुछ टिके, –घनुष की कोटि टेक कर भू पर, निज लक्ष–सिद्धि–सी, तनिक घूमकर तिरछे, जो सींच रहीं थी पर्णकुटी के बिरछे। उन सीता को, निज मूर्तिमती माया को, प्रणयप्राणा को और कान्तकाया को, यों देख रहे थे राम अटल अनुरागी, योगी के आगे अलख–जोति ज्यों जागी। अंचल–पट कटि में खोंस, कछोटा मारे, सीता माता …
Read More »साकेत: भरत का पादुका मांगना – मैथिली शरण गुप्त
“हे राघवेंद्र यह दास सदा अनुयायी‚ है बड़ी दण्ड से दया अन्त में न्यायी! हे देव भार के लिये नहीं रोता हूं‚ इन चरणों पर ही मैं अधीर होता हूं। प्रिय रहा तुम्हें यह दयाघृष्टलक्षण तो‚ कर लेंगी प्रभु–पादुका राज्य–रक्षण तो। तो जैसी आज्ञा आर्य सुखी हों बन में‚ जूझेगा दुख से दास उदास भवन में। बस‚ मिले पादुका मुझे‚ …
Read More »साकेत: राम का उत्तर – मैथिली शरण गुप्त
“हा मातः‚ मुझको करो न यों अपराधी‚ मैं सुन न सकूंगा बात और अब आधी। कहती हो तुम क्या अन्य तुल्य यह वाणी‚ क्या राम तुम्हारा पुत्र नहीं वह मानी? अब तो आज्ञा की अम्ब तुम्हारी बारी‚ प्रस्तुत हूं मैं भी धर्म धनुर्धृतिधारी। जननी ने मुझको जना‚ तुम्हीं ने पाला‚ अपने सांचे में आप यत्न कर डाला। सबके ऊपर आदेश …
Read More »
Kids Portal For Parents India Kids Network