Ajit Pal Singh has been an Indian Hockey Player, and considered to be one of the most charismatic Center Halves the world of Hockey has ever seen. Apart from playing for the Indian Hockey team, he also led the team to wing the World Cup Hockey in 1975. Early Life He was born on the 1st of April 1947 at …
Read More »Yearly Archives: 2015
चंदन बन डूब गया – किशन सरोज
छोटी से बड़ी हुईं तरुओं की छायाएं धुंधलाईं सूरज के माथे की रेखाएं मत बांधो‚ आंचल मे फूल चलो लौट चलें वह देखो! कोहरे में चंदन वन डूब गया। माना सहमी गलियों में न रहा जाएगा सांसों का भारीपन भी न सहा जाएगा किन्तु विवशता यह यदि अपनों की बात चली कांपेंगे आधर और कुछ न कहा जाएगा। वह देखो! …
Read More »चांद का कुर्ता – रामधारी सिंह दिनकर
हठ कर बैठा चांद एक दिन माता से यह बोला सिलवा दो मां मुझे ऊन का मोटा एक झिंगोला सन सन चलती हवा रात भर जाड़े में मरता हूं ठिठुर ठिठुर कर किसी तरह यात्रा पूरी करता हूं आसमान का सफर और यह मौसम है जाड़े का न हो अगर तो ला दो मुझको कुर्ता ही भाड़े का बच्चे की …
Read More »चंद अशआर गुनगुनाते हैं – अरुणिमा
यों ही हम जहमतें उठाते हैं चंद अशआर गुनगुनाते हैं वे बताते हैं राह दुनियां को अपनी गलियों को भूल जाते हैं लेते परवाज़ अब नहीं ताइर सिर्फ पर अपने फड़फड़ाते हैं पांव अपने ही उठ नहीं पाते वे हमे हर लम्हें बुलाते हैं आप कहते हैं –क्या कलाम लिखा? और हम हैं कि मुस्कुराते हैं जिनको दरिया डुबो नहीं …
Read More »चलती रहीं तुम – बुद्धिनाथ मिश्र
मैं अकेला था कहाँ अपने सफर में साथ मेरे छांह बन चलती रहीं तुम। तुम कि जैसे चांदनी हो चंद्रमा में आब मोती में, प्रणय आराधना में चाहता है कौन मंजिल तक पहुँचना जब मिले आनंद पथ की साधना में जन्म जन्मों में जला एकांत घर में और बाहर मौन बन जलती रहीं तुम। मैं चला था पर्वतों के पार …
Read More »बोआई का गीत – धर्मवीर भारती
गोरी-गोरी सौंधी धरती-कारे-कारे बीज बदरा पानी दे! क्यारी-क्यारी गूंज उठा संगीत बोने वालो! नई फसल में बोओगे क्या चीज ? बदरा पानी दे! मैं बोऊंगा बीर बहूटी, इन्द्रधनुष सतरंग नये सितारे, नयी पीढियाँ, नये धान का रंग बदरा पानी दे! हम बोएंगे हरी चुनरियाँ, कजरी, मेहँदी राखी के कुछ सूत और सावन की पहली तीज! बदरा पानी दे! ∼ धर्मवीर …
Read More »बुनी हुई रस्सी – भवानी प्रसाद मिश्र
बुनी हुई रस्सी को घुमाएं उल्टा तो वह खुल जाती है और अलग अलग देखे जा सकते हैं उसके सारे रेशे मगर कविता को कोई खोले ऐसा उल्टा तो साफ नहीं होंगे हमारे अनुभव इस तरह क्योंकि अनुभव तो हमें जितने इसके माध्यम से हुए हैं उससे ज्यादा हुए हैं दूसरे माध्यमों से व्यक्त वे जरूर हुए हैं यहां कविता …
Read More »ब्याह की शाम – अजित कुमार
ब्याह की यह शाम‚ आधी रात को भाँवर पड़ेंगी। आज तो रो लो तनिक‚ सखि। गूँजती हैं ढोलके– औ’ तेज स्वर में चीखते– से हैं खुशी के गीत। बंद आँखों को किये चुपचाप‚ सोचती होगी कि आएंगे नयन के मीत सज रहे होंगे नयन पर हास‚ उठ रहे होंगे हृदय में आश औ’ विश्वास के आधार नाचते होंगे पलक पर …
Read More »बोलो माँ – अंजना भट्ट
तिनका तिनका जोड़ा तुमने अपना घर बनाया तुमने, अपने तन के सुंदर पौधे पर हम बच्चों को फूल सा सजाया तुमने, हमारे सब दुख उठाये और हमारी खुशियों में सुख ढूँढा तुमने, हमारे लिये लोरियाँ गाईं और हमारे सपनों में खुद के सपने सजाए तुमने। हम बच्चे अपनी राह चले गये, और तुम, दूर खड़ी अपना मीठा आशीर्वाद देती रहीं। …
Read More »Nebraska
Nebraska lies immediately to the north of the geographic center of the conterminous United States, bounded on the north by South Dakota, on the west by Colorado and Wyoming, on the south by Kansas, and on the east by Iowa and Missouri. The extreme length of the state from south to north is 330 km (205 mi), and its extreme …
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