ब्याह की शाम – अजित कुमार

ब्याह की यह शाम‚
आधी रात को भाँवर पड़ेंगी।
आज तो रो लो तनिक‚ सखि।

गूँजती हैं ढोलके–
औ’ तेज स्वर में चीखते– से हैं खुशी के गीत।
बंद आँखों को किये चुपचाप‚
सोचती होगी कि आएंगे नयन के मीत
सज रहे होंगे नयन पर हास‚
उठ रहे होंगे हृदय में आश औ’ विश्वास के आधार
नाचते होंगे पलक पर
दो दिनों के बाद के… आलिंगनों के‚ चुंबनों के वे सतत व्यापार
जिंदगी के घोर अनियम में‚ अनिश्चय में
नहीं हैं मानते जो हार।

किंतु संध्या की उदासी मिट नहीं पाती‚
बजें कितने खुशी के गीत
और जीवन के अनिश्चय बन न पाते कभी निश्चय‚
हाय। क्रम इस जिंदगी के… साथ के विपरीत।
साँवली इस शाम की परछाइयाँ कुछ देर में
आकाश पर तारे जड़ेंगी‚

अश्रुओं के तारकों को तुम संजो लो
आज तो रो लो तनिक सखि‚
ब्याह की यह शाम‚
आधी रात को भांवर पड़ेंगी।

— अजित कुमार

About Ajit Kumar

अजित कुमार, जन्म– 9 जून 1933, लखनऊ, उत्तर प्रदेश। विधाएँ– उपन्यास, कविता, कहानी, यात्रा, संस्मरण, आलोचना। उपन्यास– छुट्टियाँ। कहानी– छाता और चारपाई। आलोचना– इधर की हिन्दी कविता, कविता का जीवित संसार। संस्मरण– दूर वन में, सफरी झोले में, निकट मन में, यहाँ से कहीं भी, अँधेरे में जुगनू, सफरी झोले में कुछ, जिनके संग जिया। संपादन– अकेले कंठ की पुकार, बच्चन निकट से, आचार्य रामचंद्र शुक्ल विचारकोश, हिंदी की प्रतिनिधि श्रेष्ठ कविताएँ (दो खंड), आठवें दशक की श्रेष्ठ प्रतिनिधि कविताएँ, बच्चन रचनावली (नौ खंड), सुमित्राकुमारी सिन्हा रचनावली, बच्चन की आत्मकथा, बच्चन के चुने हुए पत्र, कीर्ति चौधरी की कविताएँ, कीर्ति चौधरी की कहानियाँ, कीर्ति चौधरी की समग्र कविताएँ, नागपूजा और ओंकारनाथ श्रीवास्तव की अन्य कहानियाँ, बच्चन के साथ क्षण भर, दुनिया रंग बिरंगी, ओंकारनाथ के बीबीसी प्रसारण का संचयन।

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