Home » Poems For Kids » Poems In Hindi » तुम कभी थे सूर्य – चंद्रसेन विराट

तुम कभी थे सूर्य – चंद्रसेन विराट

तुम कभी थे सूर्य लेकिन अब दियों तक आ गये‚
थे कभी मुखपृष्ठ पर अब हाशियों तक आ गये।

यवनिका बदली कि सारा दृष्य बदला मंच का‚
थे कभी दुल्हा स्वयं‚ बारातियों तक आ गये।

वक्त का पहिया किसे कब‚ कहां कुचले क्या पता‚
थे कभी रथवान अब बैसाखियों तक आ गये।

देख ली सत्ता किसी वारांगना से कम नहीं‚
जो कि अध्यादेश थे‚ खुद अर्जियों तक आ गये।

देश के संदर्भ में तुम बोल लेते खूब हो‚
बात ध्वज की थी चलाई‚ कुर्सियों तक आ गये।

प्रेम के आख्यान में तुम आत्मा से थे चले
घूम फिर कर देह की गोलाइयों तक आ गये।

कुछ बिके आलोचकों की मानकर ही गीत को‚
तुम ऋचाएं मानते थे‚ गालियों तक आ गये।

सभ्यता के पंथ पर यह आदमी की यात्रा‚
देवताओं से शुरू की‚ वहशियों तक आ गये।

∼ चंद्रसेन विराट

About 4to40 Team

Check Also

When is the earth nearest to the sun?

When is the earth nearest to the sun?

The earth is nearest to the sun on about the second or third day in …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *