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लगाव - निदा फ़ाज़ली

लगाव – निदा फ़ाज़ली

तुम जहाँ भी रहो
उसे घर की तरह सजाते रहो
गुलदान में फूल सजाते रहो
दीवारों पर रंग चढ़ाते रहो
सजे बजे घर में हाथ पाँव उग आते हैं
फिर तुम कहीं जाओ
भले ही अपने आप को भूल जाओ
तुम्हारा घर
तुम्हें ढूंढ कर वापस ले आएगा

~ निदा फ़ाज़ली

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