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खेल - निदा फ़ाज़ली

खेल – निदा फ़ाज़ली

आओ
कहीं से थोड़ी–सी मिट्टी लाएँ
मिट्टी को बादल में गूँधे
चाक चलाएँ
नए–नए आकार बनाएँ

किसी के सर पे चुटिया रख दें
माथे ऊपर तिलक सजाएँ…
किसी के छोटे से चेहरे पर
मोटी सी दाढ़ी फैलाएँ

कुछ दिन इन से दिल बहलाएँ
और यह जब मैले हो जाएँ
दाढ़ी चोटी तिलक सभी को
तोड़–फोड़ के गड–मड कर दें
मिली–जुली यह मिट्टी फिर से
अलग अलग साँचों में भर दें

– चाक चलाएँ
नए–नए आकार बनाएँ
दाढ़ी में चोटी लहराए
चोटी में दाढ़ी छुप जाए
किसमें कितना कौन छिपा है
कौन बताए?

∼ निदा फ़ाज़ली

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