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माहिष्मती साम्राज्यम्: बाहुबली गान - मनोज मुन्ताशिर

माहिष्मती साम्राज्यम्: बाहुबली गान – मनोज मुन्ताशिर

माहिश्मती साम्राज्यम्
सर्वोत्तम् अजेयम्
दसो दिशाएं आगे आ
सब इसको करते प्रणाम
खुशहाली वैभवशाली
समृद्धियाँ निराली
धन्य धन्य है यहाँ प्रजा
शक्ति का ये स्वर्ग था
घन गरज जो किलके यहाँ
दिग दिगंत में है कहाँ
शीश तो यहाँ झुका ज़रा
यशास्वीनी है ये धरा
महिष्मति की पताका
सदा यूँही गगन चूमे
अश्व दो और सूर्य देव मिलके
स्वर्ग सिंघासन विराजे

~ मनोज मुन्ताशिर

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