Poems For Kids

Poetry for children: Our large assortment of poems for children include evergreen classics as well as new poems on a variety of themes. You will find original juvenile poetry about trees, animals, parties, school, friendship and many more subjects. We have short poems, long poems, funny poems, inspirational poems, poems about environment, poems you can recite

सुभाष चन्द्र बोस: गोपाल प्रसाद व्यास

सुभाष चन्द्र बोस - गोपाल प्रसाद व्यास: देश भक्ति कविता

है समय नदी की बाढ़ कि जिसमें सब बह जाया करते हैं, है समय बड़ा तूफ़ान प्रबल पर्वत झुक जाया करते हैं। अक्सर दुनिया के लोग समय में चक्कर खाया करते हैं, लेकिन कुछ ऐसे होते हैं, इतिहास बनाया करते हैं। यह उसी वीर इतिहास-पुरुष की अनुपम अमर कहानी है, जो रक्त कणों से लिखी गई,जिसकी जय-हिन्द निशानी है। प्यारा …

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हैं सुभाष चन्द्र बोस अमर: हरजीत निषाद

हैं सुभाष चन्द्र बोस अमर Hindi poem on Netaji Subhash Chandra Bose

परमवीर निर्भीक निडर, पूजा जिनकी होती घर घर, भारत मां के सच्चे सपूत, हैं सुभाष चन्द्र बोस अमर। सन अट्ठारह सौ सत्तानवे, नेता जी महान थे जन्मे, कटक ओडिशा की धरती पर, तेईस जनवरी की शुभ बेला में। देशभक्तों के देशभक्त, दूरंदेश थे अति शशक्त, नारा जय हिन्द का देकर बोले, आजादी दूंगा तुम देना रक्त। आजादी की लड़ी लड़ाई, …

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वो था सुभाष: रोहित कुमार ‘हैप्पी’

वो था सुभाष - Hindi Patriotic Poem on Subhas Chandra Bose

वो था सुभाष, वो था सुभाष वो भी तो खुश रह सकता था महलों और चौबारों में उसको लेकिन क्या लेना था तख्तो – ताज – मीनारों से? वो था सुभाष, वो था सुभाष अपनी मां बंधन में थी जब कैसे वो सुख से रह पाता रणदेवी के चरणों में फिर क्यों ना जाकर शीश चढ़ाता? अपना सुभाष, अपना सुभाष …

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नेताजी का तुलादान: गोपाल प्रसाद व्यास

नेताजी का तुलादान - गोपाल प्रसाद व्यास: Patriotic Poem on Subhash Chandra Bose

देखा पूरब में आज सुबह, एक नई रोशनी फूटी थी। एक नई किरन, ले नया संदेशा, अग्निबान-सी छूटी थी॥ एक नई हवा ले नया राग, कुछ गुन-गुन करती आती थी। आज़ाद परिन्दों की टोली, एक नई दिशा में जाती थी॥ एक नई कली चटकी इस दिन, रौनक उपवन में आई थी। एक नया जोश, एक नई ताज़गी, हर चेहरे पर …

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राष्ट्रगान मुझको भी आता है: मनोहर लाल ‘रत्नम’

राष्ट्रगान मुझको भी आता है: मनोहर लाल ‘रत्नम’

जन गण मन बीमार पड़ा है, अधिनायक है कहाँ सो गया, भारत भाग्य विधाता भी तो, इन गलियों में कहीं खो गया। मेरे भारत के मस्तक पर, है आतंक की काली छाया – कर्णधार जितने भारत के, इन सबको है संसद भाता। मुझसे यदि पूछ कर देखो, राष्ट्रगान मुझको है आता॥ आग लगी है पंजाब मेरे में, सिंधु और गुजरात …

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वन्दे मातरम्: बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय

वन्दे मातरम् - बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय

वन्दे मातरम् भारत का संविधान सम्मत राष्ट्रगीत है। बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय द्वारा संस्कृत बाँग्ला मिश्रित भाषा में रचित इस गीत का प्रकाशन सन् 1882 में उनके उपन्यास आनन्द मठ में अन्तर्निहित गीत के रूप में हुआ था। इस उपन्यास में यह गीत भवानन्द नाम के सन्यासी द्वारा गाया गया है। इसकी धुन यदुनाथ भट्टाचार्य ने बनायी थी। ∼ बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय हिन्दी-अनुवाद …

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ऐ मेरे प्यारे वतन, ऐ मेरे बिछड़े चमन: सलिल चौधरी

Kabuliwala - Rabindranath Tagore Classic English Short Story

ऐ मेरे प्यारे वतन, ऐ मेरे बिछड़े चमन, तुझ पे दिल कुर्बान तू ही मेरी आरजू, तू ही मेरी आबरू, तू ही मेरी जान तेरे दामन से जो आये उन हवाओं को सलाम चूम लूँ मैं उस ज़ुबां को जिसपे आये तेरा नाम सब से प्यारी सुबह तेरी, सब से रंगीं तेरी शाम माँ का दिल बनके कभी सीने से …

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इस मोड़ से जाते हैं: गुलज़ार

इस मोड़ से जाते हैं: गुलज़ार

इस मोड़ से जाते हैं कुछ सुस्त कदम रस्ते कुछ तेज कदम राहें। पत्थर की हवेली को शीशे के घरौंदों में तिनकों के नशेमन तक इस मोड़ से जाते हैं। आंधी की तरह उड़ कर इक राह गुजरती है शरमाती हुई कोई कदमों से उतरती है। इन रेशमी राहों में इक राह तो वह होगी तुम तक जो पहुंचती है …

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