Tag Archives: Breeze Hindi Poems

एक बरस बीत गया: अटल जी की नए साल पर कविता

एक बरस बीत गया - अटल बिहारी वाजपेयी

Another lovely poem by Atal Ji. One more year has passed by and one can just observe and feel inside the emptiness of this uninterrupted yet repetitive stream of passage of time… एक बरस बीत गया: अटल बिहारी वाजपेयी झुलसाता जेठ मास शरद चांदनी उदास सिसकी भरते सावन का अन्तर्घट रीत गया एक बरस बीत गया। सींकचों में सिमटा जग …

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श्वेत कबूतर: अचानक मिलने वाली खुशी पर कविता

श्वेत कबूतर: वीरबाला भावसार

श्वेत कबूतर कविता: It happens some times. We get suddenly and without expecting, some thing that we had longed for a long long time. Heart is thrilled, and it sings, and dances! Coming of a white pigeon is a metaphor of such a rare thrill. श्वेत कबूतर कविता: डॉ. वीरबाला मेरे आंगन श्वेत कबूतर! उड़ आया ऊंची मुंडेर से, मेरे …

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मेघ आये बड़े बन ठन के, सँवर के: सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

मेघ आये बड़े बन ठन के, सँवर के - सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

भारत में मॉनसून हिन्द महासागर व अरब सागर की ओर से हिमालय की ओर आने वाली हवाओं पर निर्भर करता है। जब ये हवाएं भारत के दक्षिण पश्चिम तट पर पश्चिमी घाट से टकराती हैं तो भारत तथा आसपास के देशों में भारी वर्षा होती है। ये हवाएं दक्षिण एशिया में जून से सितंबर तक सक्रिय रहती हैं। वैसे किसी …

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घर की याद: भवानी प्रसाद मिश्र की प्रसिद्ध हिंदी कविता

घर की याद - भवानी प्रसाद मिश्र

भवानी प्रसाद मिश्र हिन्दी के प्रसिद्ध कवि तथा गांधीवादी विचारक थे। वह ‘दूसरा सप्तक’ के प्रथम कवि हैं। गांंधी-दर्शन का प्रभाव तथा उसकी झलक उनकी कविताओं में साफ़ देखी जा सकती है। उनका प्रथम संग्रह ‘गीत-फ़रोश’ अपनी नई शैली, नई उद्भावनाओं और नये पाठ-प्रवाह के कारण अत्यंत लोकप्रिय हुआ। प्यार से लोग उन्हें भवानी भाई कहकर सम्बोधित किया करते थे। …

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भीग रहा है गाँव: अखिलेश कुमार सिंह

भीग रहा है गाँव - अखिलेश कुमार सिंह

मुखिया के टपरे हरियाये बनवारी के घाव सावन की झांसी में गुमसुम भीग रहा है गाँव धन्नो के टोले का तो हर छप्पर छलनी है सब की सब रातें अब तो आँखों में कटनी हैं चुवने घर में कहीं नहीं खटिया भर सूखी ठाँव निंदियारी आँखें लेकर खेतों में जाना है रोपाई करते करते भी कजली गाना है कीचड़ में …

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पुरबा जो डोल गई: शिवबहादुर सिंह भदौरिया

एक बूंद: अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’

भदौरिया जी का जन्म 15 जुलाई सन 1927 को ग्राम धन्नीपुर रायबरेली उत्तर प्रदेश में हुआ था। ‘हिंदी उपन्यास सृजन और प्रक्रिया’ पर कानपुर विश्व विद्यालय ने उन्हें पीएच.डी. की उपाधि से अलंकृत किया था। 1967 से 1972 तक बैसवाड़ा स्नातकोत्तर महाविद्यालय में हिंदी प्रवक्ता से लेकर विभागाध्यक्ष तक के पदों पर रहे। 1988 में कमला नेहरु स्नातकोत्तर महाविद्यालय के …

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बूँद टपकी एक नभ से: भवानी प्रसाद मिश्र

बूँद टपकी एक नभ से - भवानी प्रसाद मिश्रा

भवानी प्रसाद मिश्र हिन्दी के प्रसिद्ध कवि तथा गांधीवादी विचारक थे। वह ‘दूसरा सप्तक’ के प्रथम कवि हैं। गांंधी-दर्शन का प्रभाव तथा उसकी झलक उनकी कविताओं में साफ़ देखी जा सकती है। उनका प्रथम संग्रह ‘गीत-फ़रोश’ अपनी नई शैली, नई उद्भावनाओं और नये पाठ-प्रवाह के कारण अत्यंत लोकप्रिय हुआ। प्यार से लोग उन्हें भवानी भाई कहकर सम्बोधित किया करते थे। …

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रिम झिम बरस रहा है पानी: मानसून बारिश पर कविता

रिम झिम बरस रहा है पानी - राजीव कृष्ण सक्सेना

वैज्ञानिकों का कहना है कि उत्तरी गोलार्द्ध में जो अतिआक्रामक प्रदूषण हो रहा है, उससे दक्षिणी गोलार्द्ध प्रभावित हुए बिना कैसे रह सकता है? थर्मल पॉवर प्लांट्स से निकलने वाली कार्बन डाई-ऑक्साइड और सल्फर डाई-ऑक्साइड दुनिया के कई-कई देशों सहित भारत में भी तबाही मचा रही है। इंपीरियल कॉलेज, लंदन के एक शोध में बताया गया है कि यूरोप में …

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आया वसंत: सोहनलाल द्विवेदी की बसंत पर बाल-कविता

आया वसंत - सोहनलाल द्विवेदी

Here is a simple poem on spring for children. The scenery described comprising the mustard fields and flowering of mango trees is something that many urban children today would not be familiar with. For old timers, these things arouse nostalgia. आया वसंत: सोहनलाल द्विवेदी आया वसंत आया वसंत छाई जग में शोभा अनंत सरसों खेतों में उठी फूल बौरें आमों …

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स्नेह निर्झर बह गया है: सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

स्नेह निर्झर बह गया है: सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

Love is the essence. As retreating water leaves the sand dry, so does lost love leave a person drained and lifeless. Here is a beautiful expression by Suryakant Tripathi Nirala. स्नेह निर्झर बह गया है: सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ स्नेह निर्झर बह गया है, रेत सा तन रह गया है। आम की यह डाल जो सूखी दिखी‚ कह रही है – अब …

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