किसी गांव में दो भाई रहते थे – मटकू और टमकू। मटकू गोल-मटोल था और मटक-मटक कर चलता था, इसीलिए उसका नाम मटकू था। टमकू पतला-दुबला था और उसकी आंखें बार-बार झपकती थीं, इसलिए उसका नाम टमकू था।
उनके घर में नल नहीं था। पानी दूर से एक हैंडपंप से लाना पड़ता था। मां घर का सारा काम करके थक गई थी इसलिए उसने मटकू से कहा, “बेटा जाकर एक बाल्टी पानी ला दो। मुझे खाना बनाना है।”
दो भाई: कुसुम अग्रवाल
“ठीक है। मैं अभी ला देता हूं।” कह कर मटकू बाल्टी लेकर चल पड़ा।
अभी वह हैंडपंप से पानी भर ही रहा था कि एक तोता उसके पास आया।
तोता बोला, “मटकू भैया मुझे बहुत प्यास लगी है। मुझे थोड़ा पानी पिला दो।”
मटकू बोला, “हां-हां, क्यों नहीं? पर कैसे पिलाऊं?” मटकू सोच में पड़ा गया।
तभी उसे एक नारियल का खोल दिखाई दिया। मटकू वह खोल उठा लाया और धोकर उसमें पानी भर दिया। तोते को बड़ी जोरों की प्यास लगी थी। नारियल के खोल में उसने बड़ी आसानी से पानी पी लिया। फिर बोला, “धन्यवाद मटकू भैया। अब मैं बाग में जाता हूं।” यह कह कर तोता बाग में चला गया और मटकू फिर से बाल्टी भरने लगा।
अभी मटकू पानी भर ही रहा था कि इतनी देर में वहां एक मोर आया। मटकू को पानी भरते देखकर मोर बोला, “मटकू भैया, मैं बहुत प्यासा हूं। मुझे थोड़ा पानी पिला दो।”
“हां-हां, क्यों नहीं? पर तुम पानी कैसे पिओगे? यह नारियल का खोल तो तुम्हारे लिए बहुत छोटा है।” मटकू ने उसे खोल दिखाते हुए कहा। तभी मटकू की नजर एक पुराने घड़े पर पड़ी। मटकू ने घड़े को आधा तोड़कर उसके निचले भाग में पानी भर दिया और बोला, “लो अब पियो पानी।”
मोर ने जी भर के पानी पिया और बोला “धन्यवाद मटकू भैया। तुमने मेरी प्यास बुझाई है। इसके बदले तुम चाहो तो मेरा एक सुंदर पंख ले सकते हो।”
मटकू को मोर पंख बहुत पसंद थे इसलिए उसने एक मोर पंख ले लिया। इतनी ही देर में तोता फिर आया। उसकी चोंच में एक ताजा अमरूद था।
तोता बोला, “लो मटकू भैया, यह अमरूद ले लो। बहुत मीठा है। मैंने चख कर देखा है।” यह कहते हुए तोते ने वह अमरूद मटकू को दे दिया।
मटकू पानी की बाल्टी के साथ-साथ अमरूद और मोर का पंख भी लेकर घर आ गया।
टमकू ने जब मटकू के हाथ में मोर का पंख व अमरूद देखा तो उसने पूछा, “यह तुम्हें कहां से मिले ?”
मटकू ने सारी बात बता दी। सारी बात सुनकर टमकू भी अगले दिन पानी लेने गया। वह हैंडपंप चलाकर बाल्टी भरने लगा परंतु उसकी नजरें तो तोते और मोर को ढूंढ रही थीं।
उड़ता-उड़ता फिर वही तोता आया और बोला, “टमकू भैया, मुझे बड़ी प्यास लगी है। मुझे थोड़ा पानी पिला दो।”
टमकू के मन में तो अमरूद का लालच था। वह बोला, “पिला दूंगा, पहले जाकर मेरे लिए अमरूद लेकर आओ।”
यह सुनकर तोता वहां से चला गया। कुछ ही देर में मोर भी आ गया। वह बोला, “टमकू भैया मैं बहुत प्यासा हूं। मुझे थोड़ा पानी पिला दो।”
“हां-हां पिला दूंगा, पहले तुम अपना सुंदर पंख मुझे दे दो।” टमकू ने ललचाई आंखों से मोर के पंखों को देखते हुए कहा।
मोर को टमकू की बात पर बड़ा गुस्सा आया वह बोला, “ठीक है आओ मेरे पास ओर मेरा एक सुंदर पंख ले लो।”
टमकू मोर के पास गया। मोर ने अपनी चोंच टमकू के हाथ में मारी और बोला यह लो अपने लालच का फल। इतनी देर में तोता भी वहां आ गया। उसकी चोंच में एक सड़ा-गला अमरूद था।
उसने अमरूद टमकू के सिर पर गिरा दिया और बोला, “यह लो अमरूद। जैसा तुम्हारा मन है वैसा ही अमरूद तुम्हारे लिए लाया हूं सड़ा हुआ।” टमकू रोने लगा उसे अपने लालच का फल मिल गया था।
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