तीन वरदान: हिंदी नैतिक कहानी छात्रों और बच्चों के लिए

तीन वरदान: हिंदी नैतिक कहानी छात्रों और बच्चों के लिए

एक घना जंगल था। उसमें नीमा व नीरू नामक हाथी और एक हथिनी भी रहते थे। वे दोनों हमेशा अन्य हाथियों के झुंड से अलग ही रहते थे। इस कारण यह था कि उन दोनों की सूंड बहुत ही छोटी थी इसलिए जंगल के सारे हाथी उनको नकचा-नकची कहकर चिढ़ाते थे। नीमा और नीरू भगवान शिव और पार्वती को अपना इष्टदेव मानते थे।

एक दिन उनकी भक्ति से खुश होकर देवी पार्वती ने भगवान शंकर से कहा, “प्रभु… मैं पिछले कई वर्षों से देख रही हूं कि नीमा और नीरू नामक यह जोड़ा आपकी निःस्वार्थ भक्ति करता आ रहा है। क्यों न इनको इनकी भक्ति का ईनाम दिया जाए।”

तीन वरदान: गोविन्द भारद्वाज

“बात तो आप सही कह रही हैं देवी… चलो अभी वेश बदलकर इनको तीन वरदान देकर आते हैं” भगवान शंकर ने मुस्कराते हुए कहा।

शिव और पार्वती दोनों ब्राह्मण का रूप धारण कर पृथ्वी लोक के उस जंगल में पहुंच गए। नीमा और नीरू को देखकर बोले, “लगता है आप दोनों भगवान शंकर और माता पार्वती के सच्चे भक्त हैं।”

“जी ब्राह्मण देवता” नीमा ने कहा। इस पर पार्वती जी बोली, “आप दोनों की भक्ति से प्रसन्न होकर शिवजी ने हमें तुम्हें तीन वरदान देने के लिए भेजा है।”

नीमा ने नीरू से पूछा, “नीरू तू ही बता हम दोनों को पहला वरदान क्या मांगना चाहिए?”

वह बोली, “देखो, जंगल के सारे हाथी हम दोनों की छोटी सूंड होने के कारण नकचा-नकची कहकर चिढ़ाते हैं इसलिए हमें पहले वरदान में अपनी लम्बी सूंड मांग लेनी चाहिए।”

“हां, तुमने ठीक कहा। चलो पहले वरदान के लिए भगवान शिव से प्रार्थना करते हैं” उसने कहा।

उन दोनो ने आख मीचकर प्राथना को, “हे शिव शंकर महाराज हम दोनों आपसे पहले वरदान के लिए प्रार्थना करते हैं कि हमको लम्बी- लम्बी सूंडें दे दो।”

“उसी समय उनके कानों में आवाज आई, “तथास्तु।” नीमा और नीरू ने झट से अपनी आंखें खोलीं और अपने आप को देखने के लिए तालाब के किनारे पहुंचे। उन्होंने पानी में झांक कर देखा तो वे बहुत दुखी हुए।

क्योंकि वरदान के अनुसार उनको एक सूंड मिलने की बजाय ढेरों सूंड मिल गईं जबकि उनको कहना चाहिए था कि दोनों को एक-एक लम्बी सूंड दे दो।

जो उनको देखता उनसे डर के मारे दूर भाग जाता क्योंकि इतनी सारी सूंड वाले तो हाथी ही नहीं होते। नीमा ने नीरू को समझाते हुए कहा, “अभी भी दो वरदान बाकी हैं। तुम कहो तो हम दूसरा वरदान मांग कर ये फालतू की सारी सूंडें हटवा देते हैं।”

”हां… हां ये ठीक रहेगा” नीरू ने झट से कहा। पहले की तरह ही फिर उन्होंने भगवान शिव की आराधना की और वरदान मांगते हुए कहा, “हे भगवान हम दोनों की सारी सूंड वापस ले लो।”

पहले की तरह ही उनके कानों में आवाज आई, “तथास्तु”। हुआ यह कि उनको पुरानी छोटी वाली सूंड भी चली गई। वे अब बिना सूंड के हो गए। वे जिधर से निकलते सभी उनका और मजाक उड़ाते।

एक दिन फिर नीरू ने नीमा से कहा, “अभी एक वरदान बाकी है, अब की बार मैं वरदान मांगूंगी।”

“क्या मांगेगी अब…” नीमा ने दुखी होकर पूछा।

नीरू बोली, “हम तो पहले जैसे ही ठीक थे। हम तो अपनी पहले जैसी ही सूंड वापस मांग लेते हैं।”

“यह ठीक रहेगा” नीमा ने कहा।

नीरू ने अंतिम वरदान के लिए भगवान शिव का ध्यान किया। ध्यान करते ही नीरू ने तीसरा वरदान मांगते हुए कहा, “हे प्रभु हमें तो पहली जैसी ही सूंड लौटा दो…।”

तीन वरदान: हिंदी नैतिक कहानी
तीन वरदान: हिंदी नैतिक कहानी

“तथास्तु” फिर आवाज सुनाई दी। अगले ही क्षण उनकी पहले वाली छोटी सूंड वापस आ गई लेकिन नीरू को तीनों वरदान बेकार होने का बहुत दुख हुआ।

उधर देवी पार्वती ने भगवान शंकर से कहा, “ये क्या भोले… आपने वरदान भी दिए और उनको लाभ भी कुछ नहीं हुआ।”

भोले शंकर ने मुस्कराते हुए कहा, “नीमा और नीरू तो मुझसे ज्यादा भोले निकले इन्होंने जो मांगा वह मिला लेकिन अभिलाषा पूरी नहीं हुई।”

देवी पार्वती और भगवान शिव उनके भोलेपन से भी बहुत प्रसन्न हुए उन्होंने जल्दी ही उन्हें सुंदर और लम्बी सूंड दे दी।

~ गोविन्द भारद्वाज, अजमेर

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