एक गरीब की दर्द भरी कहानी: सेकंड हैंड

एक गरीब की दर्द भरी कहानी: सेकंड हैंड

हर इतवार को गाड़ी धोने वाले राममेहर का चेहरा आज ख़ुशी से चमक रहा था।

जैसे ही मैंने कार की चाभी पकड़ाई, वह हँसते हुए बोला – “साइकिल बहुत पुरानी हो गई थी, तो एक्टिवा ले ली मैंने…”

मैंने कहा-“अरे वाह, आज तो नाश्ते के साथ मिठाई भी खाकर जाना”।

“साहब एक बार ज़रा देख लेते” वह चहकते हुए बोला।

क्यों नहीं, कहते हुए मैं उसके साथ ही सीढ़ियाँ उतरने लगा।

तभी पड़ोस वाले शर्मा जी सामने वाले घर से बोले – “इसमें इतना उछलने की क्या बात है, लग तो सैकेंड हैंड रही है”।

राममेहर की हँसी गायब हो गई। मैं सन्न रह गया।

मैंने शर्मा जी की बात को अनसुनी करते हुए कहा – “ये तो बिलकुल नई लग रही है। बहुत बहुत बधाई हो”।

पर शर्मा जी की ज़ुबान का विष राममेहर के शरीर में उतर चुका था। वह आँसूँ छुपाता हुआ कार पोंछने लगा।

वैसे तो मेरी आदत कभी किसी की दिल दुखाने की नहीं रही है पर गरीबी का मज़ाक उड़ते देख मैं सीधा शर्मा जी के पास पहुँचा।

पीले रंग का स्वटर पहने वह चाय की चुस्कियाँ ले रहे थे।

मैंने पूछा – “ये स्वेटर कहाँ से लिया आपने”?

“बिटिया लाई है अमरीका से, इम्पोर्टेड है”।

“लग तो रहा है किसी विदेशी की उतरन है”।

शर्मा जी ने मुझे खूंखार नज़रों से देखा और फ़िर अचानक ही बोले – “गलती हो गई यार”।

राममेहर से माफ़ी माँगिये, कहते हुए मैं अपने घर आ गया।

थोड़ी ही देर बाद राममेहर शर्मा जी को बड़े चाव से अपनी एक्टिवा दिखा रहा था और शर्मा जी उसके कंधे पर हाथ धरे बड़ी तल्लीनता से उसकी बात सुन रहे थे।

~ डॉ. मंजरी शुक्ला

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