कहते हुए शर्मा भाभी का मुँह विद्रूप हो उठा मानो बेटी ना हुई हो कोई साँप या छछूंदर पैदा हो गया हो।
हमका तो समझ नहीं आवत है कि तीन-तीन बेटियों के बाद भी बेटा क्यों नहीं जन पा रही है।
सत्तर के ऊपर हो चुकी मोहल्ले की सबसे की उम्रदराज़ अम्मा मानों दहाड़ी… अम्मा कहने को तो सत्तर के ऊपर थी, पर उनकी आवाज़ में इतनी बुलंदी थी कि उनके घर के सामने से निकलने वाला नास्तिक भी भगवान से मनाने लगता था कि कहीं वो चबूतरे पर बैठी ना दिख जाए वरना अगर उसके आस पड़ोस में भी किसी के घर लड़की पैदा हुई हो तो उसकी खैर नहीं…
कितनी बार अम्मा की मंझली बेटी श्यामा ने अम्मा को दबे स्वर में समझाया भी… पर उस दिन समझो, घर में अम्मा ने उसका रहना दूभर कर दिया और हारकर शयामा ने जान लिया कि अम्मा सिर्फ़ उसके भाई को ही प्यार करती है और वो सिर्फ़ गलती से अम्मा के घर आ गई थी।
तभी शर्मा आंटी फिर बोली – “अम्मा, पता नहीं, मोहल्ले की सारी महरिया काहे बिटिया पैदा करत है… खिलाई, पिलाई और पढ़ाई में पहले ढेर पैसा खर्च करो और फिर सब दूसरे के घर चला जात है”।
तभी श्यामा दबे स्वर में बोली – “अम्मा, औरत की कोई गलती नहीं है लड़का या लड़की पैदा होने में, ये तो मर्द के कारण होता है”।
“चुप रह मनहूस, बड़ी आई हमका पाठ पढ़ावे वाली”।
“हम सब जानत है कि ये पिछले जन्म के पापों कि गठरिया है जो बिटिया बनाकर उपरवाला किस्मत फोड़ने के लिए झोली में डाल देत है”।
“हम तो तोहका भी जन्म नहीं देना चाहत रहे, पर ऊ… ऊ… का होत है, जिससे लड़का लड़की पेट में ही पता चल जात है… दाई ने शर्मा भाभी की ओर घूरते हुए पूछा”।
वो कोई मशीन तो होत है अम्मा ,पर हमें उसका नाम नहीं पता है… शर्मा भाभी दार्शनिक मुद्रा में सामने छत की ओर ताकते हुए बोली, जहाँ पर एक लड़का खड़ा हुआ उन्हें लगातार देखे जा रहा था।
अपने सौंदर्य के प्रति सजग होते हुए वो दायें गाल पर आई हवा से उड़ती लटों को बड़ी ही अदा से एक ऊँगली में घुमाते हुए हुए कनखियों से सामने छत की तरफ़ बार- बार देखने लगी।
तभी उन्होंने देखा कि सामने वाले लड़के ने अपना हाथ धीरे से हवा में उठाया वो भी इसका प्रत्तुतर देती कि इसके पहले ही उनकी नज़र सामने खड़ी श्यामा पर पड़ी जो पलकें नीचे करी मुस्कुरा रही थी।
शर्मा भाभी का जैसे दिल बैठ गया और वो झटके से उठ खड़ी हुई।
अम्मा बोली – “अरी, कहाँ चल दी”।
“कहाँ जाऊँगी, घर जा रही हूँ”।
तभी श्यामा ने अपनी कजरारी आखें उठाते हुए भोलेपन से पूछा – “तो क्या अम्मा, हम वर्मा आंटी के यहाँ नहीं जाएंगे उन्हें बिटिया होने की बधाई देने”।
“किस बात की बधाई… हम कहत है कि इससे अच्छा तो कुत्ता, बिल्ली पैदा कर देती, कम से कम घर के काम तो आते”।
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