नन्हे दोस्त: पक्षियों के लिए दाना-पानी की बाल-कहानी

नन्हे दोस्त: पक्षियों के लिए दाना-पानी की बाल-कहानी

“पूरी कॉलोनी में बस एक यही पेड़ बचा है हमारे लिए” नीतू गौरिया ने चुलबुल तोते से कहा।

“मुझे तो समझ ही नहीं आ रहा है कि सब लोग पेड़ कटवा क्यों रहे है” चुलबुल ने दुखी होते हुए कहा।

“अरे, तुम दोनों कहाँ चले गए थे?” पेड़ के झुरमुट से टिन्नू गिलहरी की आवाज़ आई।

नीतू चहकते हुए बोली – “टिन्नू, हम सामने वाले पार्क में पानी पीने के लिए गए थे”।

“सच! मुझे भी बताओ ना, प्यास से मेरा गला सूखा जा रहा है” टिन्नू ने अपनी झबरीली पूछ हिलाते हुए कहा।

“वो देखो, सामने बगीचे वाला पाइप बीच से फटा है ना, वहीँ से पानी निकल रहा है” नीतू बोली।

“मैं अभी पीकर आती हूँ” कहते हुए टिन्नू झट से पेड़ से नीचे उतर गई।

नन्हे दोस्त: मंजरी शुक्ला की बाल-कहानी

टिन्नू को देखकर थोड़ी ही देर बाद वहाँ पर कई कौए, बुलबुल ओर मैना आ गई”।

सभी पक्षी बहुत खुश थे और पानी पीने के बाद ठंडी बौछारों में खेल रहे थे। गौरैयाँ तो ख़ुशी के मारे पानी में फुदक फुदक कर खेलने लगी।

उधर माली अपने सिर पर हाथ रखे परेशान खड़ा था।

वह पानी की बर्बादी देखकर बहुत दुखी हो रहा था। थोड़ी देर सोचने के बाद वह सामने वाली किराने की दुकान से सेलो टेप लेकर आया और पाइप के पास आकर खड़ा हो गया।

उसे देखकर डर के मारे सभी पक्षी वहाँ से तुरंत उड़ गए।

माली ने पाइप के छेद पर स्लो टेप कसकर लपेट दिया।

देखते ही देखते पाइप से पानी का बहना बंद हो गया।

सभी पक्षियों ने एक दूसरे की तरफ दुखी होते हुए देखा और वहाँ से उड़ गए।

माली अपनी अक्लमंदी पर खुश होता हुआ सामने वाली दुकान पर वापस पहुँचा और दुकानदार से बोला – “तुम लोगो ने देखा कि मैंने पानी की कितनी बर्बादी रोक दी”।

सभी लोगो ने माली की तरफ प्रशंसा भरी नज़रों से देखा।

माली फूलकर कुप्पा हो गया।

तभी उसकी नज़र दो छोटे बच्चों पर पड़ी जो गुस्से से उसे देख रहे थे।

माली को समझ नहीं आया कि भला बच्चे उससे क्यों नाराज़ है।

उसने बच्चों के पास जाकर बड़े ही प्यार से पूछा – “तुम दोनों क्या मुझसे नाराज़ हो”?

पहला बच्चा बोला – “इतने मोटे पाइप में हमने कितनी मेहनत ही छेद किया था और आपने हमारी सारी मेहनत ख़राब कर दी”।

ये सुनते ही माली आश्चर्य से बोला – “पर भला तुम लोगो ने ऐसा क्यों किया था”?

दूसरा बच्चा तुरंत बोला – “अंकल, जैसे आपको और हमें प्यास लगती है ना, वैसे ही इन पक्षियों को भी लगती है। पाइप से जो फुहार निकलती है उसी से ये सब पानी पीते है और आपके पानी की कोई बर्बादी नहीं हो रही है। वो पानी आपके बगीचे में ही तो जा रहा है”।

“हाँ, देखिये तो, वहाँ पर लगे फूलों के पेड़ कितने हरे भरे है” दूसरे बच्चे ने खुश होते हुए कहा।

बच्चों की बात सुनकर माली के साथ साथ वहाँ खड़े लोग भी सन्न रह गए।

तभी दुकानदार बोला – “हम सब लोग इन पक्षियों के लिए दाना-पानी रखेंगे ताकि इन्हें पाइप से पानी गिरने का इंतज़ार ना करना पड़े और ये जब चाहे तब खा पी सके”।

माली काका ने प्यार से बच्चों के सिर पर हाथ फेरा और बोला – “अब हमें कोई पेड़ काटने को कहेगा तो हम उसे बताएँगे कि ये पक्षियों का घर है और हम किसी का घर नहीं तोड़ेंगे”।

बच्चों के चेहरों पर मुस्कान छा गई और माली काका चल दिए बगीचे की ओर, पाइप से टेप हटाने के लिए…

~  मंजरी शुक्ला

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