कुदरत पर उपकार: National Bird Day Special Hindi Story

कुदरत पर उपकार: National Bird Day Special Hindi Story

“नाना जी… नाना जी… हम दोनों भाई फुटबॉल खेलने बगीचे में जाएं?” गुल्लू ने अपने नाना जी से पूछा।

“हां… नाना जी घर में खेलने में मजा नहीं आता…।” छोटू ने भी कहा।

नाना जी ने मुस्कुराते हुए कहा, “ठीक है बेटा… जरा संभल कर खेलना। यह पहाड़ी इलाका है… जमीन भी उबड़-खाबड़ है… कहीं पानी के नाले भी हैं।”

कुदरत पर उपकार: National Bird Day Special Hindi Story

गुल्लू और छोटू छुट्टियों में उत्तराखंड के एक गांव में अपनी ननिहाल आए हुए थे। उनके नाना सूरज सिंह गांव के मुखिया थे।

दोनों फुटबॉल लेकर टेकरी वाले बगीचे में पहुंच गए। वे बड़ी मस्ती में फुटबॉल खेल रहे थे। अचानक छोटू ने जोरदार किक मारी। फुटबॉल तेजी से जा रही थी। गुल्लू उसे पकड़ने के लिए दौड़ लगाने लगा। उसके पीछे-पीछे छोटू भी दौड़ पड़ा।

“छोटू तुमने इतनी जोर से किक क्यों मारी… देखो फुटबॉल कहीं दिखाई नहीं दे रही… लगता है किसी नाले या पहाड़ी गुफा में चली गई।” गुल्लू ने कहा।

दोनों भाई फुटबॉल ढूंढ़ने में लग गए। अचानक एक गहरे नाले की तरफ से कुछ फुसफुसाहट सुनाई दी। उसने आगे बढ़कर देखा कि कुछ पहाड़ी लोग जाल बुन रहे थे। गुल्लू के कदम डर के मारे ठहर गए। “क्या हुआ भैया… रुक क्यों गए?” छोटू ने पूछा।

“चुप… शोर नहीं… कुछ लोग इस गहरे नाले में हैं… शायद उन्होंने ही हमारी फुटबॉल उठाई है।” गुल्लू ने मुंह पर उंगली रखते हुए धीरे से कहा। धीरे-धीरे दोनों गहरे नाले तक पहुंच गए। तभी छोटू बोला, “देखो भैया, इनके पास बड़े-बड़े पिंजरे हैं और उनमें रंग-बिरंगे पहाड़ी पंछी बंद हैं।”

“नाना जी ने कहा था कि यहां खतरा हो सकता है इसलिए संभल कर खेलना… सचमुच यहां तो बहुत खतरा है… ये लोग सुंदर-सुंदर पंछियों को पकड़कर शहरों में बेचते हैं… या फिर…।” गुल्लू ने छोटू के कान में धीरे से कहा।

फिर दोनों ने घर चलने का इशारा किया। दौड़ते हुए घर पहुंचे तो उनकी सांसें फूली हुई थीं। उसी समय सूरज सिंह भी आ गए। गुल्लू ने कहा, “नानाजी… नानाजी… गांव से दूर गहरे नाले में…।” उसने उन्हें सारी बात बता दी।

नानाजी ने कहा, “आज पंचायत में भी इसी बात का जिक्र चल रहा था कि अपने गांव के इलाके में पहाड़ी पक्षियों की संख्या दिनों-दिन घटती जा रही है… अब समझा कि इसके पीछे कौन है।”

दूसरे दिन सूरज सिंह ने पुलिस और वन विभाग को सूचना दी। छोटू और गुल्लू के बताए नाले पर छापा मारा। सचमुच जो छोटू-गुल्लू ने बताया था, वैसा ही निकला।

आठ-दस लोग उस इलाके में पंछियों को पकड़ने का काम कर रहे थे। उनके पास से बरामद पिंजरों में रंग-बिरंगे पहाड़ी तोते, छोटी-छोटी खूबसूरत चिड़ियां और भी कई प्रकार के पंछी मिले।

पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर लिया। छोटू-गुल्लू के नाना जी को पुलिस अधिकारी ने कहा, “आपका बहुत बहुत शुक्रिया… जो आपने पंछियों के तस्करों को पकड़वाने में हमारी मदद की।

“मदद मैंने नहीं, मेरे इन दोनों नातियों ने की है। इन्होंने ही इस नाले में इनको सबसे पहले देखा था। यह है छोटू और यह है गुल्लू।” सूरज सिंह ने मूंछों पर ताव देते हुए कहा।

“शाबाश बच्चो… तुम सचमुच पंछी प्रेमी ही नहीं हो, बल्कि सच्चे देशभक्त भी हो। हजारों पंछियों की जान बचाकर तुम दोनों ने इन पर बड़ा उपकार किया है। वन विभाग को पंछी घटने का रहस्य अभी तक पता नहीं चल सका था।”

वन विभाग के अधिकारी ने भी उन्हें शाबाशी देते हुए कहा, “आपने पक्षियों पर ही नहीं, कुदरत पर भी बहुत बड़ा उपकार किया है।”

“सर आप की ओर से हमारी छोटी-सी मदद हो जाए तो…।” छोटू ने पूछा।

“कैसी मदद?” वन अधिकारी ने पूछा।

“यही कि हमारी फुटबॉल इसी नाले में कहीं खो गई है… वह मिल जाती तो…।” गुल्लू ने कहा।

उनकी बात सुनकर वहां खड़े सभी लोगों की हंसी छूट पड़ी। वन अधिकारी ने उनके सिर पर हाथ फेरते हुए कहा, ” बेटा आपकी फुटबॉल जरूर खोजेंगे… यदि नहीं मिली तो हम एक नहीं, दो फुटबॉल दोनों भाइयों के लिए दिलवाएंगे।” अधिकारी की बात सुनकर छोटू-गुल्लू बड़े खुश हुए।

~ ‘कुदरत पर उपकार‘ National Bird Day Special Hindi Story by ‘गोविन्द भारद्वाज‘, अजमेर

  • National Bird Day, celebrated annually on January 5th

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