दो मित्रों की दास्तान: दोस्ती पर एक प्रेरणादायक कहानी

दो मित्रों की दास्तान: दोस्ती पर एक प्रेरणादायक हिंदी कहानी

दो मित्र भ्रमण करने निकले। पदयात्रा करते हुए उन्होंने कई जंगल और कई घाटियाँ पार कीं। चलते-चलते वे दोनों आपस में बातें भी कर रहे थे।

उसी दौरान एक मित्र के मुख से कुछ ऐसे शब्द निकल गए, जो दूसरे मित्र को बहुत बुरे लगे। वह आग-बबूला हो गया। उन शब्दों को सुनकर वह आपा खो बैठा और उसने अपने मित्र को एक थप्पड़ जड़ दिया।

दो मित्रों की दास्तान

अब दोनों आपस में बोल नहीं रहे थे, किंतु यात्रा जारी थी। चलते-चलते वे समुद्र के किनारे पहुँच गए।

वहाँ सायं का समय हो गया। वहीं विश्राम करना था। जिस मित्र ने कड़वे शब्द बोले थे, वह समुद्र किनारे रेत पर लिखने लगा। उसने लिखा, “मैं और मेरा मित्र दोनों साथ-साथ बहुत दूर तक चले। दोनों बहुत खुश थे और आगे बढ़ रहे थे, लेकिन मेरी ज़ुबान फिसल गई और मेरे मुँह से कड़वे वचन निकल गए। मेरा भाव ऐसा नहीं था, लेकिन मेरा मित्र समझ नहीं पाया और उसने मेरे मुँह पर थप्पड़ जड़ दिया। मुझे बहुत दुख हुआ।”

उसे कुछ लिखता हुआ देखकर उसका मित्र पास आया। उसने अपने मित्र के शब्द पढ़े। तभी हवा का एक झोंका आया और रेत पर लिखा हुआ सब कुछ मिट गया। लिखने वाले मित्र ने समुद्र की लहरों की ओर देखा और मुस्करा कर रह गया।

रात्रि में दोनों ने वहीं विश्राम किया।

प्रातःकाल यात्रा पुनः प्रारंभ हो गई। आज वे कहीं नदी किनारे पहुँचे। पत्थरों के पास चलते समय, हड़बड़ाहट में रेत पर संस्मरण लिखने वाले मित्र का पैर फिसल गया और वह नदी में गिर पड़ा। उसे तैरना नहीं आता था, इसलिए वह डूबने लगा।

उसके मित्र ने गहरे पानी में बिना सोचे-समझे छलांग लगा दी और अपने मित्र को बचा लिया।

अभी भी दोनों आपस में बोल नहीं रहे थे। यात्रा गतिमान थी और दोनों फिर चल दिए।

सायं के समय मित्र ने फिर लिखना शुरू किया, लेकिन आज वह अपने जीवन की डायरी रेत पर नहीं, पत्थर पर लिख रहा था।

उसने लिखा – “आज मेरा मित्र महान बन गया। आज उसने अपने प्राणों की बाज़ी लगाकर मुझे मौत के मुँह से बचा लिया। कल मुझे उसके अंदर शैतान के दर्शन हुए थे, लेकिन आज वह देवता बन गया। आज उसने मुझे नई ज़िंदगी दी है। मैं उसके इस अहसान को कभी नहीं भूलूँगा।”

आज उसके मित्र ने देखा कि वह बहुत देर से लिख रहा है। कल तो वह रेत पर लिख रहा था, लेकिन आज पत्थर पर लिख रहा है।

मित्र पास आया, पढ़ा और उससे रहा न गया। उसने कहा – “कल इतनी ज़ोर से मैंने तुम्हें थप्पड़ मारा था, तो तुमने वह कहानी रेत पर लिख दी। आज पत्थर पर लिख रहे हो। जबकि कल तो हमारी यात्रा आगे बढ़ जाएगी, फिर इस लिखे हुए पत्थर को कौन पढ़ेगा?”

पहले मित्र ने उत्तर दिया – “मैंने जीवन में यही सीखा है कि बुराई को रेत पर लिखो, जो हवा के एक झोंके के साथ मिट जाए, धूमिल हो जाए। अर्थात् बुराई को भूलने की कोशिश करनी चाहिए। लेकिन यदि किसी ने तुम्हारे साथ अच्छा किया है, तो उसे पत्थर पर लिखो, जिसे न हवा मिटा सके, न कोई लहर हटा सके और न ही समय का प्रभाव मिटा सके, क्योंकि अच्छाई हमेशा जीवन भर रहनी चाहिए।”

उसने आगे कहा – “तुमने मेरे साथ जो किया, वह इंसानियत के लिए प्रेरणा का सबक है। हम तो कल यहाँ से आगे बढ़ जाएँगे, लेकिन तुम्हारे कर्म से प्रेरणा लेने वाले लोग आते रहेंगे।”

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