वर्षा के मेघ कटे - गोपी कृष्ण 'गोपेश' शब्द चित्र

वर्षा के मेघ कटे: गोपी कृष्ण ‘गोपेश’

वर्षा के मेघ कटे –
रहे–रहे आसमान बहुत साफ़ हो गया है,
वर्षा के मेघ कटे!

पेड़ों की छाँव ज़रा और हरी हो गई है,
बाग़ में बग़ीचों में और तरी हो गई है –
राहों पर मेंढक अब सदा नहीं मिलते हैं
पौधों की शाखों पर काँटे तक खिलते हैं
चन्दा मुस्काता है;
मधुर गीत गाता है –
घटे–घटे,
अब तो दिनमान घटे!
वर्षा के मेघ घटे!!

ताल का, तलैया का जल जैसे धुल गया है;
लहर–लहर लेती है, एक राज खुल गया है –
डालों पर डोल–डोल गौरैया गाती है
ऐसे में अचानक ही धरती भर आती है
कोई क्यों सजता है
अन्तर ज्यों बजता है
हटे–हटे
अब तो दुःख–दाह हटे!
वर्षा के मेघ कटे!!

साँस–साँस कहती है –
तपन ज़र्द हो गई है –
प्राण सघन हो उठे हैं,
हवा सर्द हो गई है –
अपने–बेगाने
अब बहुत याद आते हैं
परदेसी–पाहुन क्यों नहीं लौट आते हैं?
भूलें ज्यों भूल हुई
कलियाँ ज्यों फूल हुईं
सपनों की सूरत–सी
मन्दिर की मूरत–सी
रटे–रटे
कोई दिन–रैन रटे।
वर्षा के मेघ कटे।

~ गोपी कृष्ण ‘गोपेश’

आपको गोपी कृष्ण ‘गोपेश’ जी की यह कविता “वर्षा के मेघ कटे” कैसी लगी – आप से अनुरोध है की अपने विचार comments के जरिये प्रस्तुत करें। अगर आप को यह कविता अच्छी लगी है तो Share या Like अवश्य करें।

यदि आपके पास Hindi / English में कोई poem, article, story या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें। हमारी Id है: submission@sh035.global.temp.domains. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ publish करेंगे। धन्यवाद!

Check Also

Bunker: 2026 Javier Bardem Hollywood Psychological Thriller Film Trailer & Review

Bunker: 2026 Javier Bardem Hollywood Psychological Thriller Film Trailer & Review

Movie Name: Bunker Directed by: Florian Zeller Starring: Penélope Cruz, Javier Bardem, Stephen Graham, Paul …