पहन कर साड़ी पीली-पीली,खेतों में इतराई सरसों।
क्यारी-क्यारी खड़ी-खड़ी,
मंद-मंद मुस्कुराई सरसों।
स्वागत में बसंत ऋतु की,
बढ़-चढ़ आगे आयी सरसों।
करके धरती माँ का श्रृंगार,
मन ही मन हर्षाई सरसों।
पुरवा पवन के झोंकों संग,
कोहरे में लहराई सरसों।
पहन कर साड़ी पीली-पीली,क्यारी-क्यारी खड़ी-खड़ी,
मंद-मंद मुस्कुराई सरसों।
स्वागत में बसंत ऋतु की,
बढ़-चढ़ आगे आयी सरसों।
करके धरती माँ का श्रृंगार,
मन ही मन हर्षाई सरसों।
पुरवा पवन के झोंकों संग,
कोहरे में लहराई सरसों।
प्रत्येक स्वतंत्र राष्ट्र का अपना एक विशिष्ट ध्वज होता है, जो उसकी सम्प्रभुता, अखंडता और …