माँ - दिल छू जाने वाली हिंदी कविता

माँ: दिल छू जाने वाली हिंदी कविता

मै तेरा गुनेहगार हूँ माँ
मै तुझे भूल गया
उन झूठे रिश्तो के लिए
जो मैंने बाहर निभाए
उन झूठे नातो के लिए
जो मेरे काम ना आये
मै तेरा गुनेहगार हूँ माँ
बॉस के कुत्ते को कई बार
डॉक्टर को दिखाना पड़ा
पुचकार कर उसे खुद
अपना हाथ भी कटवाना पड़ा
पर तेरा चश्मा न बनवा पाया
तुझे दवा भी ना दिलवा पाया
मैं शर्मिंदा हूँ माँ उन
सभी आसुओं के लिए
जो तेरी आँखों से बहे
मै तेरा गुनेहगार हूँ माँ
वो सर्दी मे पुराने ट्रंक से
तेरे दो स्वेटर निकाल देना
और घर की पुरानी चादरों से तुझे उढ़ा देना
फटी चप्पलो से तेरा पूरा साल निकलवा देना
और नई माँगने पर तुझे सौ बाते सुना देना
मै तेरा गुनेहगार हूँ माँ
उसके बाद झूठी शान के लिए
मैक्डॉनल्स में बर्गर खाना
बच्चो को पिज़्ज़ा हट घुमाना
करवा चौथ पर बीवी
को डिजाइनर साड़ी दिलवाना
मै तेरे नौ महीने का कष्ट
भूल गया और उसका एक
दिन का उपवास याद रहा
मै तेरा गुनेहगार हूँ माँ
हरी साड़ी के साथ तेरा नीला ब्लाउज़
मुझे कभी अजीब नहीं लगा
तेरे बालो की पकती सफ़ेदी
भी मुझे कभी नहीं दिखी
जब मैंने और मेरी बीवी ने
अपने बाल डाई किये
और होटल को चल दिए
तो तूने फीकी मुस्कान से मुझे देखा
मुझे थिएटर में हीरो के मरे बाप को
देखकर पिताजी की बरसी याद आई
मुझे माफ़ कर देना माँ
मै तेरा गुनेहगार हूँ माँ

~ डॉ. मंजरी शुक्ला

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