रमज़ान का पाक महीना बस अलविदा कहने को तैयार है। रमज़ान के ख़त्म होते ही जो ईद मनाई जाती है, उसे ईद-उल-फितर कहा जाता है। इस्लाम समुदाय में इस त्योहार को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। मस्जिदों को सजाया जाता है, लोग नए कपड़े पहनते हैं, घरों में एक से बढ़कर एक पकवान बनते हैं, छोटों को ईदी दी जाती है और एक-दूसरे से गले लगकर ईद की मुबारकबाद दी जाती है। हालांकि, इस साल लॉकडाउन के चलते, सभी लोग अपने-अपने घरों में ही ईद मनाएंगे। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, रमज़ान के बाद 10वें शव्वाल की पहली तारीख को ईद-उल-फितर का त्योहार मनाया जाता है। ईद कब मनाई जाएगी यह चांद के दीदार से तय होता है।
ईद हो हर दिन: संजीव वर्मा “सलिल”
ईद हो हर दिन हमारा,
दिवाली हर रात हो।
दिल को दिल से जीत लें हम,
नहीं दिल की मात हो…
भूलकर शिकवे शिकायत,
आओ हम मिल लें गले।
स्नेह सलिला में नहायें,
सुबह से संझा ढले।
आंख तेरी ख्वाब मेरे,
खुशी की बारात हो…
दर्द मुझको हो तो तेरी
आंख से आंसू बहे।
मेरे लब पर गजल
तेरे अधर पर दोहा रहे।
जय कहें जम्हूरियत की
खुदी वह हालात हो…
छोड दें फिरकापरस्ती
तोड नफरत की दिवाल।
दूध पानी की तरह हों एक
ऊंचा रहे भाल।
“सलिल” की शहनाई,
सबकी खुशी के नग्मात हो…
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