RAPE: Sexual Violence Against Women मेरी इज्जत सिर्फ 20 रुपए की?

मेरी इज्जत सिर्फ 20 रुपए की?

चौंक गए न आप यह बात सुन कर? पर बात सुनना ठीक है। भारत में औरत की इज्जत शायद 20 रुपए से भी कम है। एक औरत की इज्जत भोजन की एक प्लेट की कीमत से भी कम कैसे हो गई? उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में छोटी-छोटी दुकानों में ‘बलात्कार के वीडियोज’ की गर्मा-गर्म बिक्री इस बात की गवाही है और इन वीडियोज की कीमत-सिर्फ 20 रुपए।

इस तरह हमने घर बैठकर किसी की इज्जत लूटने को मनोरंजन का एक तरीका बना लिया है। अल जज़ीरा ने इस मुद्दे को कवर करते हुए जब एक इंटरव्यू में ऐसे वीडियोज किराए पर लेकर जाने वाले ऐसे ही शख्स से, पूछा कि क्या उसे यह घिनौना काम करते हुए शर्म नहीं आई तो उसका जवाब था, “ऐसी वीडियोज देखकर उसके मन को शांति मिलती है।”

वाह! आपने अपनी मां, पत्नी, बहन तथा बेटी को तो संभाल लिया समाज की बेड़ियां पहनाकर, पर किसी और की मां, बहन, पत्नी तथा बेटी आपके हवस के घोड़ों पर सवार हो सकती है।

पुलिस सूत्रों से जब इस गतिविधि के बारे में पूछा गया तो उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। अब उनका भी कोई कसूर नहीं। बेचारे देश के बड़े-बड़े मसलों में उलझे हुए हैं – कभी मंत्री के साहबजादे को इल्जाम से बचाना है, कभी गरीब पर फर्जी केस दर्ज करना है, कभी बेकसूर को हवालात में पीट-पीट कर अधमरा करना है और पैसे वालों की किस तरह जी-हजूरी करनी है – उन्हें कहां खाली समय मिलता है किसी औरत की इज्जत बचाने का। लाठियां तभी बरसेंगी जब किसी को अपनी मां, पत्नी, बहन या बेटी के साथ यह दर्दनाक घटना घटित हो।

एक तरफ औरत की इन ऊंचाइयों – देश की राष्ट्रपति बनी एक औरत, बैंकों, फिल्मों, खेलों, समाज सेवा, राजनीति – जो मर्जी क्षेत्र देख लें उसमें एक औरत का नाम मौजूद है परंतु दूसरी तरफ उसी औरत का नाम मौजूद है परंतु दूसरी तरफ उसी औरत के साथ इतने दुर्व्यवहार क्यों? आंकड़ो के अनुसार विगत कुछ वर्षों में औरतों के विरुद्ध हिंसा कई गुणा बढ़ी है। क्या है इसका उपाय? क्यों औरत को सिर्फ एक जिस्म माना जाता है?

शायद इसका जवाब मेरे पास है। जसपाल भट्टी जी की ओर से शुरू किया गया ‘नॉनसेंस क्लब‘ सामाजिक कुरीतियों से पिछले 30 वर्षों से जूझता आया है। 2013 में दिल्ली के दर्दनाक हादसे के बाद क्लब ने सरकार से कहा था कि औरत को एक ‘कमोडिटी’ घोषित किया जाए अर्थात एक वस्तु, एक चीज। जब हमारे संविधान में औरत एक वस्तु, एक चीज। जब हमारे संविधान में औरत एक वस्तु बन जाएगी फिर आपके साथ जो चाहे करें – उसे खरीदें, बेचें, उसका व्यापार करें, बलात्कार करें, मारें, पीटें अर्थात घर में पड़े फर्नीचर की तरह हो गई औरत।

एक बार हमने औरत को एक ‘मार्कीट कमोडिटी‘ मान लिया तो भ्रूण हत्या के विरुद्ध भी नारे लगाने की जरूरत नहीं। किसी हो-हल्ले की भी जरूरत नहीं कि मनोरंजन की दुनिया में, फिल्मों में, टी.वी. में तथा विज्ञापनों में औरत को क्यों सिर्फ एक ‘आइटम‘ ही समझ लिया जाता है। ‘चिकनी चमेली’ तथा ‘शीला की जवानी’ फिर कानों को बड़ा सुरीला संगीत लगेगा, फिर तो हनी सिंह भी खुलकर अपने गीतों में औरतों की और बेइज्जती कर सकता है। हमारे पंजाबी गीतों के वीडियोज और अश्लील हो सकते है, कहने का मतलब कि हर तरफ शांति ही शांति होगी। कोई विद्रोह की आवाज नहीं। अमेरिका में राष्ट्रपति ट्रम्प के आने से यही मामला वहां भी पैदा हो सकता है। हम सब को पता है कि उन्होंने ‘लॉकर रूम’ बातचीत में औरतों को कितनी इज्जत दी थी। हमारे लिए कितनी चिंता वाली बात होगी कि पहले हम संशोधन करें और फिर अमेरिका हमारी नकल करे। यह सचमुच ‘मेड इन इंडिया’ का कमाल होगा।

परंतु जब तक यह नहीं होता तब तक तो यह विश्वास रखें कि औरत प्रकृति की एक अदभुत शक्ति है। एक आदमी एक दिये को घिस रहा था। अचानक एक जिन्न बाहर आ गया।

आदमी ने कहा कि मुझे सबसे शक्तिशाली बना दिया जाए। उसे इतनी ताकत दे दी गई कि वह बड़े से बड़ा पत्थर उठाकर चल सकता था। फिर उसने दुनिया की सबसे तेज कार की मांग की। उसके आगे जिन्न ने फेरारी कार खड़ी कर दी। उसकी अंतिम मांग थी कि उसे सभी आदमियों से सबसे ज्यादा होशियार बना दिया जाए। जिन्न ने उसे एक औरत बना दिया।

Actual News Link: http://www.aljazeera.com/indepth/features/2016/10/dark-trade-rape-videos-sale-india-161023124250022.html

सविता भट्टी

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