हरगिला पक्षी: प्रकृति का सफाईकर्मी - Greater Adjutant Stork: Nature's Scavenger

हरगिला पक्षी: प्रकृति का सफाईकर्मी – Greater Adjutant Stork: Nature’s Scavenger

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 135वें एपिसोड में असम की ‘हरगिला आर्मी’ की तारीफ की थी। उन्होंने लुप्त होने की कगार पर पहुंचे हरगिला पक्षी को बचाने के उनके प्रयासों की सराहना की।

हरगिला पक्षी – Greater Adjutant Stork

कभी अशुभ माने जाने वाले हरगिला पक्षी ने अब असम के गांवों की पहचान बना ली है। प्रधानमंत्री ने बताया कि प्रकृति को साक-सुथरा रखने में अहम भूमिका निभाने के बाचजूद; यह पक्षी लंबे समय तक गलतफहमियों का शिकार रहा।

उन्होंने कहा, “असम में ‘हरगिला’ नामक एक पक्षी पाया जाता है। यह एक दुर्लभ पक्षी है। यह प्रकृति को साफ रखने में अहम भूमिका निभाता है। हालांकि, लम्बे समय तक असम के कुछ हिस्सों में इसे अशुभ माना जाता था। लोग इसे अपने आस-पास देखना पसंद नहीं करते थे। अक्सर, जिन पेड़ों पर ‘हरगिला’ के घोंसले होते थे, उन्हें काट दिया जाता था। जरा सोचिए, जो पक्षी पर्यावरण को साफ रखने में मदद करता है, वही लोगों के डर का शिकार बन गया।”

Postage stamp featuring the Greater Adjutant Stork (Leptoptilos dubius)
Postage stamp featuring the Greater Adjutant Stork (Leptoptilos dubius)

जीवविज्ञानी पूर्णिमा देवी बर्मन ने स्थानीय लोगों को जागरूक करके इन धारणाओं को बदलने की पहल की। उन्होंने महिलाओं से बात की और विज्ञान पर आधारित तथ्य समझाए। धीरे-धीरे, महिलाएं इस अभियान से जुड़ने लगीं। हजारों ग्रामीण महिलाएं ‘हरगिला’ को बचाने के लिए आगे आईं। आज उन्हें ‘हरगिला आर्मी’ के नाम से जाना जाता है।

खास बातें:

‘हरगिला’ नाम असमिया शब्दों ‘हर’ (हड्डी) और ‘गिला’ (निगलना) से बना है। लगभग 1.5 मीटर ऊंचा होने, गहरे रंग और मृत जानवरों को खाने की आदत के कारण, इन्हें आमतौर पर गंदा और अशुभ माना जाता था।

हरगिला को अंग्रेजी में ‘ग्रेटर एडजुटेंट स्टॉर्क‘ कहा जाता है। यह दुनिया के सबसे दुर्लभ और बड़े सारस जैसे पक्षियों में से एक है। भारत में यह मुख्य रूप से असम के अलावा बिहार के कुछ क्षेत्रों में पाया जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम Leptoptilos dubius है। इसके पंखों का फैलाव 2.5 मीटर तक हो सकता है। इसकी लंबी, मोटी चोंच और गर्दन के नीचे लटकने वाली थैली (गुलर पाञ्जच) इसकी पहचान हैं। इसके सिर और गर्दन पर बहुत कम पंख होते हैं।

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