देश प्रेम की भावना जगाते फ़िल्मी गीत

देश प्रेम की भावना जगाते फ़िल्मी गीत

देश में हिंदी फिल्म निर्माताओं में देश प्रेम और राष्ट्र भक्ति की भावना सर्वदा प्रवाहित रही है और यही राष्ट्र प्रेम की भावना उनकी फिल्मों से जुड़े विभिन्न गीतकारों के राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत उनके द्वारा रचित गीतों में भी स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है।

देश प्रेम फ़िल्मी गीत:

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता बाल फिल्म ‘हम पंछी एक डाल के’ में सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश देता अत्यंत सुन्दर गीत था:

हम पंछी एक डाल के, एक डाल के,
संग–संग डोलें, जी संग–संग डोलें।
बोली अपनी–अपनी बोलें,
चलो बंधु बंधुओ उड़ कर जाएं,
द्वार गगन के खोलें।

कई साल पहले एक बहुत अच्छी बाल फिल्म ‘जागृति’ बनी थी। इस फिल्म में जो दो गीत थे वे आज भी हर राष्ट्रीय पर्व और विभिन्न महत्वपूर्ण अवसरों पर बजाए जाते हैं। इनमे से एक गीत हैं, जिससे देश प्रेम की भावना को खूबी के साथ उजागर किया गया है।

‘आओ बच्चों तुम्हें दिखाये झाँकी हिंदुस्तान की,
इस मिट्टी से तिलक करो, धरती है बलिदान की।’

इसी फिल्म ‘जागृति’ का एक और देश भक्ति गीत

‘हम लाए हैं तूफान से किश्ती निकाल के,
इस देश को रखना मेरे बच्चो संभाल के।’

फिल्म ‘सन आफ इंडिया’ का यह गीत देखिये जिसमें एक बच्चे के दिल में देश प्रेम की भावना किस तरह हिलोरें ले रही है:

‘नन्हा मुन्ना राही हूँ, देश का सिपाही हूँ
बोलो मेरे संग जय हिंद जय हिंद जय हिंद।’

ऐसे ही फिल्म ‘उपकार‘ का यह गीत जिसमे देश की उर्वरा धरती का उल्लेख किस शान से किया गया है –

‘मेरे देश की धरती
सोन उगले,
उगले हीरे मोती,
मेरे देश की धरती।’

एक गीत बच्चों का आह्वान किया गया है कि कल के भावी कर्णधार तुम ही हो, तुम्हे अपना फ़र्ज़ कैसे निभाना है –

‘इन्साफ़ की डगर पे, बच्चों दिखाओ चल के
ये देश है तुम्हारा, नेता तुम्हीं हो कल के।’

फिल्म ‘मुझे जीने दो’ में सामाजिक समरसता का आह्वान किस प्रभावी शैली ढंग से किया गया है।

‘अब कोई गुलशन न उजड़े,
अब वतन आज़ाद है।’

इसके साथ ही अपने समृद्ध देश का अनोखे अंदाज से गुणगान करते हुए परोक्ष रूप से इसके प्रति वफादारी बरतने का संदेश भी फिल्म ‘सिकंदरे आजम’ के इस गीत में निहित है:

‘जहाँ डाल–डाल पे
सोने की चिड़ियाँ करती है बसेरा,

वो भारत देश है मेरा।’

फिल्म ‘जिस देश में गंगा बहती है’ में भी गंगा की महिमा मंडित करते हुए देश की गौरवशाली संस्कृति की तरफ इशारा कर, देश और देशवासियों के पवित्र ह्रदय का वर्णन बहुत प्रभावशाली बन पड़ा है।

‘होठों पे सच्चाई रहती है,
जहाँ दिल में सफाई रहती है,
हम उस देश के वासी हैं
जिस देश में गंगा बहती है।’

आज हमें गर्व है की हम सार्वभौमिक स्वतंत्र देश के नागरिक हैं। इस स्वतंत्रता को हमें हर हाल में कायम रखना है। चाहे इसके लिए हमें कोई भी मूल्य चुकाना पड़े, हम पीछे नहीं हटेंगे। इन्ही भावनाओं और राष्ट्रीय जज्बे से ओत–प्रोत एक संदेश फिल्म ‘लीडर’ के इस गीत से मिलता है–

‘अपनी आजादी हरगिज़ मिटा सकते नहीं,
सिर कटा सकते हैं लेकिन सिर झुका सकते नहीं।’

अब तक मुल्क की आजादी और राष्ट्र प्रेम की भावना से उत्प्रेरित जितनी भी फिल्मों का निर्माण हुआ है उनमे से फिल्म ‘हकीकत‘ विशेष उल्लेखनीय है इसीलिए की इसमें देश के लिए शहीद होने वालों की ओर से एक संदेश देशवाशियों के लिए है:

‘कर चले हम फ़िदा जानोतन साथियों
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों’।’

फिल्म ‘काबुलीवाला’ में एक ऐसे व्यक्ति की पीड़ा को अभिव्यक्त किया गया है जो देश से दूर है लेकिन देश प्रेम उसके दिल में ज्यों का त्यों हिलोरे ले है:

‘ऐ मेरे प्यारे वतन, ऐ मेरे बिछड़े चमन,
तुझ पे दिल कुर्बान।’

ऐसे ही भावना से ओत–प्रोत एक गीत फिल्म ‘फूल बने अंगारे’ का है:

‘वतन पे जो फ़िदा होगा, अमर वो नौजवां होगा।’

इसी के सामानांतर फिल्म ‘शहीद’ में कैसा मार्मिक आह्वान है:

‘वतन की राह में, वतन के नौजवां शहीद हो,
पुकारती है ये जमीं, ये आसमां शहीद हो।’

हिंदी फिल्म निर्माता, निर्देशक और गीतकार बधाई के पात्र हैं कि उन्होंने अपनी फिल्मों में राष्ट्र के प्रति अपनी भक्ति भावना को बहुत ही खूबी से निभाया।

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